78वें निरंकारी संत समागम के समापन के अवसर पर समालखा मैदानों में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की उपस्थिति में सादगीपूर्ण निरंकारी सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस वर्ष 126 नवविवाहित युगल भारत के विभिन्न राज्यों और विदेशों जैसे ऑस्ट्रेलिया व कनाडा से शामिल हुए।
समारोह का शुभारंभ पारंपरिक जयमाला और निरंकारी परंपरा के सांझा-हार से हुआ। भक्तिमय वातावरण में हिंदी में निरंकारी लावों का गायन किया गया, जिनमें नवविवाहितों के लिए आध्यात्मिक संदेश और गृहस्थ जीवन की शिक्षाएँ शामिल थीं। सतगुरु माता जी और निरंकारी राजपिता जी ने नवविवाहित जोड़ों पर पुष्पवृष्टि कर उन्हें सुखमय, आनंदमय और समर्पणमय जीवन का आशीर्वाद दिया।
सतगुरु माता जी ने विवाहित जीवन में प्रेम, सम्मान, सहयोग और बराबरी के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र संगम है। उन्होंने नवविवाहितों को सामाजिक और पारिवारिक उत्तरदायित्व निभाने, सेवा, सत्संग और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिंदर सुखीजा जी ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से यह कार्यक्रम इस वर्ष भी सादगी, एकता और समरसता का प्रतीक बना।

