शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि राजनीति और शतरंज के बीच गहरा संबंध है। दोनों ही क्षेत्रों में रणनीति, सोच-विचार और सही समय पर सही निर्णय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने यह बात ठियोग में अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस के अवसर पर आयोजित अंडर-13 शतरंज प्रतियोगिता के दौरान कही।
एस.पी. लोहिया फाउंडेशन और हिमाचल प्रदेश राज्य शतरंज एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में सात स्कूलों के 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया। शिक्षा मंत्री ने बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शिरकत की और आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
रोहित ठाकुर ने कहा कि शतरंज एक रोचक और ज्ञानवर्धक खेल है, जो बच्चों में एकाग्रता, तार्किक सोच और निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करता है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी इस खेल में रुचि रखते हैं और इसे पसंद करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इस तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन लगातार होता रहेगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ खेलों के क्षेत्र में भी बेहतर अवसर उपलब्ध करवा रही है। शतरंज को बढ़ावा देने के लिए ठाकुर राम लाल खेल छात्रावास जुब्बल में 10 सीटों का प्रावधान किया गया है, जहां खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि ठियोग विधानसभा क्षेत्र ने प्रदेश के विकास में हमेशा महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि मतियाना स्थित खेल छात्रावास भी जिला शिमला का एक प्रमुख खेल केंद्र है और भविष्य में यहां शतरंज प्रशिक्षण के लिए भी सीटों का प्रावधान किया जाएगा।
इस अवसर पर ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि शतरंज केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि बौद्धिक क्षमता, अनुशासन और रणनीतिक सोच को मजबूत करने वाला खेल है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं क्षेत्र में खेल संस्कृति को बढ़ावा देंगी और युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी।



