शिमला जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हर विकास खंड में एक-एक मॉडल विलेज (आदर्श गांव) विकसित किया जाएगा। वहीं टूटू खंड में दो मॉडल विलेज स्थापित होंगे। यह निर्णय नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग और आत्मा परियोजना की समीक्षा बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त अनुपम कश्यप ने की।
उपायुक्त ने बताया कि इन गांवों में कृषि, उद्यान, मत्स्य पालन और पशुपालन विभाग की योजनाओं को जोड़कर किसानों को लाभ दिया जाएगा। मॉडल विलेज प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित होंगे, जहां जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत और मल्चिंग जैसी तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा।
जिले में प्राकृतिक खेती से 7,000 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2025-26 में 50 क्लस्टरों में 2,500 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है, जबकि अब 18 नए क्लस्टर बनाए जाएंगे, जिससे कुल संख्या 68 हो जाएगी।
किसानों को तकनीकी सहायता देने के लिए जिले में 33 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर और 136 से अधिक कृषि सखियां तैनात हैं। प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को दो वर्षों तक प्रति एकड़ 4,000 रुपये वार्षिक प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
इसके अलावा जिले के 12 बाल देखभाल केंद्रों में बच्चों को भी प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कृषि सखियों को 5,000 रुपये मासिक मानदेय और बायो-रिसोर्स सेंटर की स्थापना के लिए 1 लाख रुपये सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।



