जिला प्रशासन ने शिमला में सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए दो महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। जिला दंडाधिकारी अनुपम कश्यप ने जहां प्रवासी श्रमिकों, रेहड़ी-फड़ी एवं फेरी वालों सहित अन्य बाहरी कामगारों का पुलिस पंजीकरण और सत्यापन अनिवार्य कर दिया है, वहीं शहर के 10 चिन्हित संवेदनशील स्थलों पर सार्वजनिक बैठकों, धरना-प्रदर्शनों, रैलियों और जुलूसों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
जारी आदेशों के अनुसार जिला शिमला में कार्यरत या रोजगार की तलाश में आने वाले सभी बाहरी व्यक्तियों को निकटतम पुलिस थाने में अपना पंजीकरण करवाना होगा। कोई भी नियोक्ता, ठेकेदार या व्यापारी किसी प्रवासी मजदूर को तब तक काम पर नहीं रख सकेगा, जब तक उसका पुलिस सत्यापन और पंजीकरण पूरा नहीं हो जाता। मकान मालिकों को भी किरायेदारों की पहचान और सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला दंडाधिकारी ने कहा कि बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से श्रमिक और अन्य लोग जिला में अस्थायी रूप से निवास करते हैं। किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए उनका पंजीकरण आवश्यक है। आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इसके साथ ही प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से छोटा शिमला, रिज, कैनेडी हाउस, स्कैंडल प्वाइंट, कालीबाड़ी मंदिर, चौड़ा मैदान, कार्ट रोड सहित 10 चिन्हित स्थलों पर सार्वजनिक सभाओं, धरना-प्रदर्शनों, रैलियों, जुलूसों, नारेबाजी और हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा सकने वाली वस्तुओं को ले जाने पर प्रतिबंध लगाया है। इन क्षेत्रों में किसी भी कार्यक्रम के आयोजन के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
प्रशासन द्वारा जारी दोनों आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और 31 जुलाई, 2026 तक प्रभावी रहेंगे।



