April 15, 2026

शिमला: टीबी चैंपियंस बने उम्मीद की किरण, रोगियों को दे रहे नई राह

Date:

Share post:

उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि टीबी संक्रामक रोग है परन्तु समय रहते निदान, नियमित दवाई और पोषक आहार के सेवन से इसे हराया जा सकता है। उपायुक्त जिला के टीबी चैंपियंस के साथ उनके अनुभव के बारे में जानकारी हासिल कर रहे थे।उन्होंने कहा कि टीबी को ख़तम करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज लोग इस बीमारी के बारे में जागरूक हैं परन्तु फिर भी बहुत से चीजें हैं जिनके बारे में टीबी चैंपियन लोगों को जागरूक कर सकते हैं ताकि टीबी ग्रसित मरीजों को इस बीमारी से लड़ने में आसानी हो। 

उन्होंने कहा कि टीबी चैंपियंस वह लोग हैं जो स्वयं इस रोग से ग्रसित थे और अब पूरी तरह ठीक हैं। जो अनुभव टीबी चैंपियंस ने किये हैं वह लोगों के बीच साझा करना बेहद जरुरी है, जिससे अन्य ग्रसित लोगों को इस बीमारी से लड़ने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि टीबी चैंपियन स्कूलों, ग्राम सभाओं और अन्य आयोजनों में लोगों को जागरूक कर सकते हैं। उन्होंने टीबी चैंपियंस को बच्चों और युवाओं को इस बारे में अधिक जागरूक करने का आवाहन किया क्योंकि यह पीढ़ी आने वाले समय में इस बीमारी को जड़ से ख़तम करने में अहम् भूमिका निभाएगी। 

टीबी ग्रसित व्यक्ति से न करें भेदभाव

उपायुक्त ने लोगों से आग्रह करते हुए कहा कि अगर हमारे आस पास कोई व्यक्ति टीबी ग्रसित पाया जाता है तो उससे भेदभाव न करें क्योंकि टीबी का इलाज शुरू होते ही मात्र 15 दिन में टीबी बैक्टीरिया के फैलने का खतरा ख़त्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का भेदभाव व्यक्ति में मानसिक तनाव पैदा करता है जो सीधे तौर पर उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है, जिससे उसे ठीक होने में ज्यादा समय लगता है। 

पौष्टिक आहार है जरूरी

उन्होंने कहा कि टीबी से लड़ने में अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता होना जरूरी है जोकि पौष्टिक आहार से प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि टीबी चैंपियंस लोगों को पौष्टिक आहार की महत्वता के बारे में भी जागरूक करें और उन्हें हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करने के लिए प्रेरित करें। 

नियमित दवाई का सेवन और उचित आहार जरूरी

शिमला से अधिवक्ता सौरव रतन ने अपनी टीबी के खिलाफ लड़ाई की जानकारी को सांझा करते हुए कहा कि कुछ साल पहले उन्हें हड्डी का क्षय रोग हुआ था। उन्होंने बताया कि टखने में सूजन थी और क्योंकि वह खिलाडी भी हैं इस वजह से उन्हें लगा की यह संभवतः चोट लगी है।

कुछ समय बाद जब उन्होंने अस्पताल में दिखाया तो उनका टेस्ट किया गया जिसमें पता चला की उनको हड्डी का क्षय रोग हुआ है। सौरव ने नियमित दवाई का सेवन शुरू किया और एक सप्ताह में ही उनका दर्द ख़तम हो गया। उन्होंने कहा कि 6 माह तक नियमित दवाई खाने से वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से लड़ने के लिए नियमित दवाई का सेवन और उचित आहार जिसमे दिन में लगभग 6 बार खाना जरुरी है। 

सरोग की कृष्णा शर्मा ने बताया कि 2020 में उनकी तबीयत खराब हुई थी और बुखार ने पूरे शरीर को जकड़ लिया था। उस समय कोरोना की लहर थी इसलिए 3 माह तक बुखार की दवाई खाती रही और एक दिन खांसी करते समय खून निकल आया। जब अस्पताल में जाँच करवाई तब पता चला की उनको फेफड़ों की टीबी है, जिसके बाद उन्होंने नियमित दवाई जारी रखी। इस दौरान उनको उल्टियां होती रही और चक्कर भी आये।

इसके साथ-साथ पूरे शरीर में कमजोरी भी आ गई पर उन्होंने 6 माह तक नियमित दवाई जारी रखी और उसके बाद वह पूरी तरह ठीक हो गई। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में सभी शाकाहारी हैं परन्तु शरीर में भारी कमजोरी को दूर करने के लिए उन्होंने अंडे खाना आरम्भ किया, जिसका उन्हें प्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला। कृष्णा शर्मा ने बताया कि जब उन्हें टीबी हुई थी तब उनके बच्चे छोटे थे इसलिए उनके बच्चों और पति को भी दवाइयां दी गई थी ताकि उन्हें टीबी न हो। हालांकि उनके अलावा परिवार में और किसी को भी टीबी नहीं हुआ।

टीबी होने पर परिवार ने बनाई दूरी, आज ठीक होकर दूसरों को कर रहे जागरूक

कोटखाई से संबंध रखने वाले संजय ने बताया कि 2015 में जब वह कॉलेज में पढ़ते थे तब उन्हें टीबी हुआ। कॉलेज में सीढियाँ चढ़ते समय सांस फूलना और बुखार की समस्या शुरू हुई। लगभग एक माह तक बुखार की दवाई खाते रहे लेकिन एक दिन खांसी होने के साथ बलगम में खून आने पर उन्होंने आईजीएमसी में अपनी जाँच करवाई जिसमें टीबी का टेस्ट भी हुआ और उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

उन्होंने टीबी के बारे में एक सप्ताह बाद अपने परिजनों को बताया जिसके बाद घरवालों ने उनसे थोड़ी दुरी बना ली। इस दौरान लगभग 20 दिन तबीयत और खराब हुई तथा खाना भी खाया नहीं जा रहा था परन्तु दवाई नियमित तौर पर जारी रखी। इस प्रकार 2 माह लगे उन्हें ठीक होने में। आज वह टीबी चैंपियन के तौर पर लोगों से मिलकर उन्हें जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह एक संस्था से जुड़े हैं जोकि टीबी से ग्रसित मरीजों खासकर मजदूरों को खाना भी उपलब्ध करवा रहे हैं। 

  मशोबरा खंड से सम्बंधित अनीता गुप्ता ने बताया कि 2020 में उनकी रीढ़ की हड्डी में दर्द शुरू हुआ, जिससे उनको उठने-बैठने में तकलीफ होती थी और इसके लिए उन्होंने दर्द निवारक दवाइयों का सेवन शुरू किया परन्तु कोई असर नहीं हुआ। जब उन्होंने इसकी जाँच अस्पताल में करवाई तब पता चला की उनको रीढ़ की हड्डी का टीबी है, जिसके लिए उनका इलाज शुरू किया गया और 3 माह तक नियमित इंजेक्शन भी लगे।

इस दौरान 3 माह तक कोई असर महसूस नहीं हुआ और उनके शरीर में पस भी पड़ गया था। 2020 से लेकर 2022 तक उनका इलाज नियमित तौर पर जारी रहा जिसकी बदौलत वह पूरी तरह से ठीक हो पाई। आज वह आशा कार्यकर्ता के तौर पर कार्य कर रही हैं और टीबी चैंपियन के रूप में लोगों को जागरूक कर रही हैं। 

मशोबरा खंड से सम्बन्ध रखने वाली दीपिका ने बताया कि 2013 में उनकी छाती में पानी भर गया था जिसकी जांच आईजीएमसी में करवाने पर पता चला कि यह टीबी है। इस बात का पता चलते ही परिवार ने उनसे दूरी बना ली परंतु पति ने पूरा साथ दिया। पति ने उनके पौष्टिक आहार और नियमित दवाई का पूरा ध्यान रखा। एक बार ठीक होने के बाद दूसरी बार फिर से टीबी हो गया परन्तु नियमित दवाइयों के सेवन से फिर ठीक हुई। 2020 में उन्हें गले में टीबी हो गया जिसके लिए उन्होंने फिर नियमित तौर पर दवाई का सेवन किया और आज 5 वर्षों से वह पूरी तरह टीबी से मुक्त है और स्वस्थ हैं। 

शिमला की नीलमा ने बताया कि 2015 में तबियत ख़राब हुई और लगभग 4 माह बाद उन्हें पता चला कि यह टीबी है। क्योंकि उस समय उनके बच्चे छोटे थे इसलिए उन्होंने 2 हफ्ते तक निजी अस्पताल से इलाज शुरू करवाया और उसके बाद सरकारी अस्पताल से इलाज जारी रखा। 6 माह तक नियमित दवाई खाई और पूरी तरह ठीक हुई।

उन्होंने बताया कि जब उनकी बीमारी का पता परिवार वालों को चला तो उन्होंने उनसे दूरी बना ली परन्तु परिवार में एक नर्स थी जिन्होंने उनको सहारा दिया और उनके परिजनों को समझाया जिसके बाद परिजनों ने भी उनका पूरा साथ दिया। उन्होंने बताया कि उनके ठीक होने लगभग 8 माह बाद उनकी बेटी को भी टीबी हो गया और उसकी छाती में पानी भर गया परन्तु समय पर जांच और नियमित दवाई से वह भी ठीक हो गयी। 

ठियोग खंड के टीबी चैंपियन चंदरमणी ने बताया कि 2021 में उन्हें आंत का टीबी हुआ था, जिसका इलाज उन्होंने शिमला के तेनजिन अस्पताल में करवाया और आज वह पूरी तरह ठीक व स्वस्थ हैं। 

हर एक सब-सेंटर में 2 टीबी चैंपियन तैयार करने का लक्ष्य

जिला टीबी अधिकारी डॉ विनीत लखनपाल ने बताया कि जिला के हर एक सब-सेंटर में 2 टीबी चैंपियन तैयार करने का लक्ष्य विभाग ने रखा है ताकि टीबी चैंपियन के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा सके और इस बीमारी को जड़ से ख़तम किया जा सके। उन्होंने बताया कि जिला में 450 टीबी चैंपियन तैयार करने का लक्ष्य है और अभी तक जिला में 180 टीबी चैंपियन तैयार किये जा चुके हैं। 

डॉ विनीत ने बताया कि अगर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक तो उसे टीबी जैसी बीमारियों का खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता मानसिक तनाव से भी कम होती है। इसके अतिरिक्त, धूम्रपान और प्रदूषण से भी टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि अक्सर आज की दौड़भाग वाली जिंदगी में लोग नाश्ता करना छोड़ देते हैं जोकि सीधे तौर पर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि नाश्ता हमारे शरीर के लिए बेहद जरुरी है। 

डॉ विनीत ने बताया कि लेटेंट टीबी का मतलब है कि आप टीबी बैक्टीरिया से संक्रमित हैं, लेकिन आपको रोग नहीं है। अर्थात आप बीमार नहीं हैं, बैक्टीरिया को नहीं फैला सकते हैं, और आमतौर पर आप में कोई लक्षण नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लेटेंट टीबी की जांच के लिए भी विभाग द्वारा 3 माह में 800 लोगों के टेस्ट किए गए हैं, जिसमे कैथू जेल में बंद कैदियों की भी जांच की गई है।

उन्होंने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को खांसी करते समय बलगम में खून आता है तो उसका मतलब यह नहीं की उसे टीबी की बीमारी हो चुकी है। इसका मतलब उस व्यक्ति को टीबी होने का 50 प्रतिशत खतरा है। उन्होंने बताया कि फेफड़े के टीबी के अतिरिक्त अन्य प्रकार का टीबी की और व्यक्ति को ट्रांसमिट नहीं होता है। 

वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर इम्पैक्ट इंडिया प्रोजेक्ट की स्टेट लीड डॉ अपर्णा ने बताया कि यह प्रोजेक्ट स्टेट नेशनल क्षय रोग उन्मूलन इकाई के साथ मिलकर टीबी मुक्त पंचायत जिसमे ग्राम प्रधान की ट्रेनिंग और टीबी मुक्त पंचायत बिंदुओं पर चर्चा करता है। इसके अतिरिक्त, हर हेल्थ सब सेंटर से टीबी सरवाइवर की पहचान कर उनकी ट्रेनिंग करवाना ताकि वह टीबी चैंपियन के रूप में अपनी ही पंचायत में टीबी की जानकारी दे सके। इस प्रोजेक्ट को स्टेट लीड डॉ अपर्णा और डिस्ट्रिक्ट लीड विक्रम जीत द्वारा सुचारू रूप से चलाया जा रहा है। 

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related articles

CM Sukhu Sanctions ₹10 Cr for Kinnaur School

Chief Minister Sukhvinder Singh Sukhu on Wednesday announced ₹10 crore for the construction of the Rajiv Gandhi Day...

ब्लूबेल्स स्कूल में धूमधाम से मनाया स्थापना दिवस

ब्लूबेल्स पब्लिक स्कूल ढली में स्थापना दिवस बड़े उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत...

CM Highlights Green Tech in Tapri Fruit Unit

CM Sukhu today inspected the world’s first geothermal-powered combined apple cold storage and fruit drying unit at Tapri...

CM Reviews Progress of Key Hydroelectric Project

CM Sukhu today reviewed the progress of the 450 MW Shongtong–Karcham Hydroelectric Project on the Satluj River during...