January 10, 2026

Tag: कविता

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यादें: एक कविता

डॉ. कमल के. प्यासा यादें याद आती हैं जाती नहीं, याद ही रह जाती हैं जिंदगी भर! यादें यादों में रह कर आती हैं सताती हैं, कमबख्त तरह तरह की फितरतें दिखा, खूब...

बुलंदियां: डॉ. कमल के. प्यासा

  डॉ. कमल के. प्यासा बुलंदियां छूना ऊंचा उठाना, अच्छा लगता है खुद को, सब को! बुलंदियां बढ़ाती हैं, दूरियां और फासले! जिनसे पनपते हैं भरम...

बू : डॉo कमल केo प्यासा

बू गंदगी की गलने की सड़ने की चाहे हो दूषित खाद्यानों की या ऋणात्मक सोच विचारों की ! बू आ ही जाती है, अंतर...

तुम कहां चले गए, याद बहुत आती है: डॉo कमल केo प्यासा

क्या कहूं कैसे कहूं किसे बताऊं कैसे बताऊं अंदर की बात तुम थे कुछ खास तुम ही याद आए ! किसे बताऊं किसे सुनाऊं...

एक पहचाण: डॉo कमल केo प्यासा

हाऊं,कुण हाकैथी हाकियांहा हामुंझो किछ भी तथोग पत्ता नी ! मेरी पक्की परख पहचाण ,हाडकुआ री कोठरुआ मंज बंदएक जियुंदा हांडदा टपदाजगह जगह थुड खांदामाणु...

समस्या: डॉo कमल केo प्यासा

प्रेषक : डॉ. कमल के . प्यासा ये समस्या है ,सब को ठन रही हैसमझता है हर कोईउलझन बड़ रही है,सिसकता रोताआंसू बहता ,बेचारा...

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