March 16, 2026

Tag: कविता

spot_imgspot_img

भूख : जीवन की अद्वितीयता और चुनौतियाँ पर डॉo कमल केo प्यासा

प्रेषक : डॉ. कमल के . प्यासा भूख, कैसी भी हो मिटती नहीं ,मुकती नहीं,बढ़ती है मरती नहीं,तड़पाती है और डालती है खलल, अक्सर...

भावनाओं का सफर — कविताएँ

डॉ कमल के प्यासा हिलोरे जीवन चक्र केझूले में,झूल हर कोई हिलोरे लेता है।कोई कमकोई अधिक,बस अपने कर्मों काफल वसूल लेता है ! रिश्ते रिश्तों के जंगल...

आदमी और दौड़ : डॉo कमल केo प्यासा

प्रेषक : डॉ. कमल के . प्यासा जीवन के हर छोर सेहर मोड़ सेहर दौड़ मेंभाग रहा है आदमी ! हर बात मेंकिसी भी हालत...

पेट : डॉo कमल केo प्यासा

प्रेषक : डॉ. कमल के . प्यासा पेट की जात नहींपात नहीं,रंग भेद की बात नहींबाहर भीतर दांत नहींइतना सा पेट,इतना खाता इतना खातासारा...

पिता : डॉक्टर जय महलवाल द्वारा रचित एक कविता

मां अगर घर की ईंट है,तो पिता समझो पूरा मकान है।मां अगर संस्कार देने वाली है,तो पिता गुणों की खान है।मां अगर अगर करती...

पी- 30 सम्मेलन और अर्थव्यवस्था

दुनियां की आबोहवा और अर्थव्यवस्था पर गहन विचार करने के लिए हमें आलमी पी-30 सम्मेलन आयोजित करना पड़ा। एक बात यहां साफ कर दें...

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla