Tag: प्रो. रणजोध सिंह

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देशभक्त – कविता

प्रो. रणजोध सिंह - नालागढ़ जब भी मैं देश भक्ति पर कुछ लिखना चाहता हूं, मेरी आत्मा बीच में आ जाती है। खूब हंसती है मुझ पर कहती है हे...

जीना इसी का नाम है : लघु कथा

प्रो. रणजोध सिंह - नालागढ़ प्रो. देवेंद्र सिंह अपनी कार में सपत्नीक मुकेश कुमार के मधुर गीत सुनते हुए अपने पुश्तैनी गांव जा रहे थे।...

रात्रि भोज – रणजोध सिंह

प्रो.रणजोध सिंह - नालागढ़ महेंद्र प्रताप सिंह जी ने टूरिज्म विभाग के शिमला होटल में प्रबंधक का नया- नया पदभार संभाला था इसलिए वह प्रत्येक...

जहां चाह वहां राह (लघुकथा) – प्रो. रणजोध सिंह , सोलन

  प्रो. रणजोध सिंह - सोलन लता हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के एक छोटे से गांव में सातवीं कक्षा की छात्रा थी| उसका स्कूल केवल...

भेडू- एक संस्मरण

मूल लेखक: प्रो. रणजोध सिंहअनुवाद: जीवन धीमान शरद ऋतु का सुहाना दिन था, मैं अपने दो अभिन्न मित्रों प्रो. तोमर और प्रो. राणा के...

खुलकर मुस्कुराया करो

प्रो. रणजोध सिंह  हर वक्त संजीदा रहना कोई अच्छी बात नहीं खुलकर मुस्कुराया करो। बारिशों का मौसम है जनाब! कभी-कभी थोड़ा भीग भी जाया करो। माना इस जहाँ में पूरी नहीं होती...

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