Tag: सामाजिकटिप्पणी

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दीवारें: डॉo कमल केo प्यासा

दीवारेंछोटी बड़ीमोटी पतलीइधर उधरऊंची नीचीयहां वहांकहीं भी दिखती हों दीवारेंबंटती हैंकाटती हैंजुदा करती हैंअपनों को अपनों से ! दीवारेंऊंची नीचीनाटी हल्कीकच्ची पक्कीमिट्टी गारेबल्लू सीमेंट कीकैसी भी...

ग़ज़ल: मानवता पर डॉo कमल केo प्यासा के विचार

आदमी को आदमी ही खाने लगा है ?लहू अपना ही खुद शर्माने लगा है !महज़ के नाम पर उठती हैं लाठियां !ईमान इतना डगमगाने...

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