विश्व पर्यावरण दिवस और हमारी भूमि

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डॉ. जय महलवाल (अनजान)

डॉ. जय महलवाल (अनजान), राजकीय महाविद्यालय, बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश

जैसा कि हम सबको विदित हैं कि हर वर्ष 5 जून को हम विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हैं। समूचे विश्व में पर्यावरण के संरक्षण हेतु जागरूकता फैलाने के लिए हर वर्ष हम विश्व पर्यावरण दिवस मनाते हैं।
शुरुआत–गौरतलब है कि विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का निर्णय 1972–1973 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए सम्मेलन में लिया गया था। जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों में पर्यावरण संबंधी जागरूकता और पर्यावरण से संबंधित चिंताओं से अवगत करवाना था। अभी तक हममें से बहुत कम लोगों को यह भी जानकारी पूर्ण रूप से नहीं है कि विश्व पर्यावरण दिवस का दूसरा नाम वन महोत्सव भी है। इस धरती पर अधिक से अधिक पेड़ पौधे और वनों का विकास करना भी इसका एक आंतरिक उद्देश्य समझा जा सकता है, जिससे कि हमारा पर्यावरण प्रदूषित न होकर साफ एवं स्वच्छ रहे। सबसे पहले सन 1973 में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया जिसका थीम ‘ओनली वन अर्थ’ था।
जनक–विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक डार्विन, हम्बोल्ट से अत्यधिक प्रभावित थे। अगर आज के परिदृश्य की बात की जाए तो आज भी हम पूरे विश्व में बहुत सारी पर्यावरण संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, कहीं ना कहीं यह परिस्थितियों हमारे अस्तित्व के लिए भी खतरा बन रही हैं। हम्बोल्ट के पर्यावरण संबंधी दृष्टिकोण एवं वैज्ञानिक जुनून की वजह से उन्हें इसका जनक माना जाता है।
थीम –पर्यावरण दिवस के मुख्य छः थीम है (१) परिवार एवम मित्र (२) भोजन (३) पानी (४)आवास (५) यात्रा (६) हम चीज़ें कैसे बनाते हैं।
वहीं दूसरी तरफ इस वर्ष का थीम ’भूमि पुनर्स्थापन, मरुस्थलीकरण और सूखा लचीलापन’ है। इसके आयोजन का नारा “हमारी भूमि और हमारा भविष्य” है।
उद्देश्य–विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य पूरे विश्व में पर्यावरण से संबंधित चुनौतियां का समाधान निकालना है। पूरे विश्व में पर्यावरण से संबंधित चिंता का निवारण करने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित यह दिवस वर्ष का सबसे बड़ा आयोजन होता है। हमें अपनी प्रकृति की रक्षा की जागरूकता और आए दिन पर्यावरण से संबंधित चुनौतियों का सामना करना है।
चुनौती–आज जहां एक ओर हम दिन प्रतिदिन हर एक दृष्टिकोण से विकसित होते जा रहे हैं वहीं पूरे विश्व में पर्यावरण संबंधी चुनौती एक गंभीर समस्या का रूप ले रही है। दिन प्रतिदिन आवासीय कॉलोनी बनाने के लिए जहां एक तरफ जंगलों का अंधाधुंध कटान किया जा रहा है, वहीं औद्योगिकरण में भी जंगलों का कटान किया जा रहा है। मानव अपनी सुविधा के लिए सड़कों का निर्माण कर रहा है जिससे कि हमारी भूमि की पकड़ भी कम होती जा रही है। धीरे-धीरे हम विकास की ओर तो बढ़ रहे हैं लेकिन अपने पर्यावरण संबंधित चिंताओं को नजर अंदाज कर रहे हैं। इसके अलावा भी पर्यावरण को हानि पहुंचाने वाली और भी चुनौतियां हमारे सामने हैं जिनमें से फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं एवं वाहनों से उत्पन्न प्रदूषण भी मानवीय जीवन को संकट में डाल सकता है। अतः समय रहते हुए हमें अपने पर्यावरण को साफ एवं स्वच्छ रखने के उपाय ढूंढने होंगे। गर्मियों के दिनों में लोग जानबूझकर अपनी थोड़ी सी सहूलियत के लिए पूरे के पूरे जंगलों को आग के हवाले कर देते हैं, जिससे कि हमारे पर्यावरण को बहुत अत्यधिक नुकसान होता है कई दिनों एवं महीनो तक लगने वाली जंगलों की आग बहुत से जंगली जानवरों पशु पक्षियों के जीवन को लील लेती है।
क्या करना चाहिए–विश्व में सभी देशों की सरकारों को यह आदेश पारित करना आज के समय में एक आवश्यकता हो गई है कि जिस भी व्यक्ति, बच्चे, बूढ़े, जवान का जन्मदिन हो उस दिन वह एक पेड़ अवश्य लगाए और उसकी जीवन पर्यंत रक्षा करें। हम अपनी धरती को जितना हरा भरा बनाएंगे हमारा पर्यावरण भी उतना ही साफ एवं स्वच्छ रहेगा। स्कूल विद्यालय एवं महाविद्यालयों तथा सरकारी एवं गैर सरकारी सभी संस्थाओं में पर्यावरण संबंधित जागरूकता फैलाने के लिए अधिक से अधिक कार्यक्रम एवं गतिविधियां आयोजित की जानी चाहिए।

वहीं है हमारी खुशहाली,
जहां जहां है पेड़ पौधों की हरियाली,
अगर काट काट कर करेंगे इनको कम,
आग लगाएंगे जानबूझकर और पेड़ लगाएंगे कम,
इस तरह से करेंगे अगर इनको हम नष्ट,
फिर कहां मिलेगी हरियाली,
और उठाना पड़ेगा ऑक्सीजन ढूंढने का कष्ट।

आओ प्रण लें – विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष पर हम सबको प्रण लेना चाहिए कि जिस पृथ्वी को हमने खतरे में डाल दिया है, उसको हम सब ने मिलकर बचाना है। अधिक से अधिक पेड़ लगाकर हमें अपने पर्यावरण को साफ एवं स्वच्छ बनाना है। इस तरह से हम अपने पूरे विश्व की तस्वीर को बदल देंगे और अपने पर्यावरण को स्वच्छ एवम सुंदर बनाकर पूरे विश्व में एक संदेश देंगे।

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Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

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