इस अवसर पर समारोह की अध्यक्षता पूर्व आईएएस अधिकारी एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्रीनिवास जोशी ने की। मंच पर मौजूद साहित्यकारों ने पुस्तक की कविताओं को संवेदनशील, विचारोत्तेजक और समकालीन यथार्थ से जुड़ा हुआ बताते हुए उन पर विस्तृत विमर्श प्रस्तुत किया।
वरिष्ठ साहित्यकारों प्रो. मीनाक्षी एफ. पॉल, आत्मा रंजन, दिनेश शर्मा और विद्यानिधि छाबड़ा ने कविता संग्रह के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए इसे एक प्रभावशाली और चिंतनशील रचना बताया। अध्यक्षीय संबोधन में श्रीनिवास जोशी ने कहा कि यह संग्रह वर्तमान समय की सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से अभिव्यक्त करता है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सत्यनारायण स्नेही ने प्रभावी ढंग से किया। लेखक गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय पूर्व में तीन कहानी संग्रह, दो उपन्यास और तीन कविता संग्रह साहित्य जगत को दे चुके हैं।
इस साहित्यिक आयोजन में शिमला सहित प्रदेशभर से लगभग 50 लेखक, कवि और संस्कृतिकर्मी शामिल हुए। उपस्थित गणमान्यजनों में जिला भाषा अधिकारी सरोजना नरवाल तथा लेखक की पत्नी शैल उपाध्याय भी विशेष रूप से मौजूद रहीं।
अंत में लेखक के सुपुत्र प्रवीण उपाध्याय ने सभी अतिथियों एवं साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया। यह कविता संग्रह अयन प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया है।