हिमाचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन (HPEA) ने घोषणा की है कि देशभर के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता 12 फरवरी को एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश ठाकुर के अनुसार यह हड़ताल पावर सेक्टर के निजीकरण के विरोध में आयोजित की जा रही है।
हड़ताल की प्रमुख मांगों में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेना तथा बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करना शामिल है।
एसोसिएशन का कहना है कि इस बार बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन प्राप्त है। कर्मचारी, इंजीनियर, मजदूर संगठनों और किसानों की संयुक्त भागीदारी से इसे स्वतंत्र भारत के इतिहास की बड़ी औद्योगिक कार्रवाइयों में से एक बताया जा रहा है।
लोकेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि पावर सेक्टर में नियमित कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है। हड़ताल की मांगों में आउटसोर्सिंग पर रोक, नियमित पदों पर सीधी भर्ती और आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण भी शामिल है।
एसोसिएशन ने चिंता जताई है कि बिजली क्षेत्र में वितरण, उत्पादन और टीबीसीबी के माध्यम से ट्रांसमिशन के निजीकरण से गरीब उपभोक्ताओं, छोटे व मध्यम उद्योगों और आम जनता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
हिमाचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने देशभर के बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं से 12 फरवरी की हड़ताल में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।



