हिमाचल : धातु अभिलेख, संदर्भ मण्डी – डॉ. कमल के. प्यासा

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डॉ. कमल के. प्यासा – जीरकपुर, (मोहाली)

मण्डी क्षेत्र से प्राप्त होने वाले धातु अभिलेखों में ताम्र पट्ट, धातु प्रतिमा, धातु देवी देवता मुखौटे, धातु पात्र व अस्त्र शस्त्र आदि आ जाते हैं।

मण्डी क्षेत्र से संबंधित कुछ धातु अभिलेख:

1.राजा जालिम सेन ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 19 वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : देवनागरी, बोली मंडयाली।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : स्व.चंद्र मणि कश्यप का निजी संग्रह, मण्डी।

अभिलेख विवरण : राजा जालिम सेन के इस ताम्र पट्ट अभिलेख का आकर

लम्बाई = 35.5सेंटीमीटर।

चौड़ाई = 18.8सेंटीमीटर।

मोटाई = 0.25सेंटीमीटर।

इस ताम्र पट्ट अभिलेख में कुल मिलाकर कर 29 पंक्तियां बनती हैं। देव नगरी के शब्दों में ख को टांकरी के ख अक्षर के द्वारा इस अभिलेख में लिखा गया है। जिन शब्दों में टांकरी का ख अक्षर मिलता है, वे हैं: खिज़्मतऔर पंक्ति क्रमांक है,6,9और 10वीं पंक्ति, 11वीं पंक्ति में बसाख, 16वीं में फिर खिज़्मत और 24 वीं पंक्ति में दो शब्दों में टांकरी का ख अक्षर मिलता है और वे हैं, बसाख व लीखा।

अभिलेख की अंतिम चार पंक्तियां जो कि देवनागरी में हैं, लेकिन इन में संस्कृत का प्रयोग किया गया है। अभिलेख की प्रथम चार पंक्तियों के नीचे अर्थात पांचवीं पंक्ति में केवल भंड १ तथा भंडा ४ लिखा मिलता है। इसी प्रकार से 8वीं पंक्ति के नीचे 9वीं पंक्ति में भी केवल भंडा लिखा मिलता है। ताम्र पट्ट के अभिलेख के ऊपर की ओर जालिम सेन और बाईं ओर देव गणेश का चित्रण देखने को मिलता है।

अभिलेख को पढ़ने से पता चलता है कि राजा जालिम सेन ने अपने वजीर धारी से खुश हो कर उसे जमीन दी थी।

अभिलेख के अंत में लिखा गया है कि संवत 1896 की पहली तारीख को इस पट्टे को दीन दयाल कायथ द्वारा लिखा गया था।

2.माधव राव प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : धातु प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख काल : 17वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : देव नगरी, भाषा संस्कृत।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : देव माधव राव मंदिर, दमदमा मण्डी।

अभिलेख विवरण : मण्डी के राजा सूरज सेन (1637-1664ईस्वी) द्वारा बनवाई गई भगवान माधव राव की यह प्रतिमा राज माधव राव मंदिर दमदमा पैलेस में स्थापित है। राजा सूरज सेन के 18पुत्रों के होने पर जब एक भी नहीं बचा तो राज ने भगवान माधव राव की इस चांदी की प्रतिमा को बनवा कर अपना राज पाठ, इन्हें ही समर्पित कर दिया था। चांदी की इसी प्रतिमा के आधार पीठ पर देवनागरी लिपि द्वारा संस्कृत में अभिलेख को उकेरा गया है।संस्कृत के अभिलेख का हिंदी रूपांतर इस प्रकार से है:

सूरज सेन पृथ्वी का स्वामी अपने वंश का नाशक क्या यह दोष रहित प्रतिमा रखने वाले को खुश रख सकेगी।

सुनार भीमा संवत 1705 वीरवार 15 फागुन।

3.राजा, अज़बर सेन ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 16वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : देवनागरी, बोली मंडयाली।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : मण्डी।

अभिलेख विवरण : राजा अज़बर सेन (1500-1534ईस्वी) के इस ताम्र पट्ट अभिलेख से मण्डी के विरुद्ध मराथु, केन्हवाल व गंधर्व के राणों द्वारा बल्ह क्षेत्र की ओर बढ़ने की जानकारी मिलती है। लेकिन राजा अज़बर सेन ने इन सभी को खदेड़ दिया था और गंधर्व का राणा इस लड़ाई में मारा गया था। इसके साथ अज़बर सेन का बेटा छत्तर सेन मराथु के राणा के विरुद्ध लड़ता रहा और टाँग में चोट खाकर हार गया था। इसी लड़ाई में मण्डी के तीन प्रमुख व्यक्ति भी मारे गए थे। जो कि तीनों एक ही परिवार से आपस में ( खत्री ) भाई थे। इसी के परिणाम स्वरूप राजा अज़बर सेन ने अपने जीते हुवे क्षेत्र से कुछ भूमि चौथे भाई मकसूदन को बदले में दे दी और ताम्र पट्ट भी दिया था, जिसमें लड़ाई का पूरा ब्यौरा दिया गया है। इसके साथ राजा द्वारा करवाए मंदिरों के निर्माण व ब्राह्मणों को दान दी गई भूमि का भी उल्लेख है। इस ताम्र पट्ट अभिलेख को संवत 1554 अर्थात1527ईस्वी को दिया गया था।

इसी तरह के कई अन्य ताम्र पट्ट अभिलेख भी न जाने किन किन के पास होगें, जिनसे कई एक ऐतिहासिक तथ्य छिपे होगें।

हिमाचल : धातु अभिलेख, संदर्भ चंबा – डॉ. कमल के. प्यासा

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