हिमाचल : धातु अभिलेख, संदर्भ चंबा – डॉ. कमल के. प्यासा

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डॉ. कमल के. प्यासा – जीरकपुर (मोहाली)

पत्थर की तरह ही धातु कठोर और स्थाई होते हैं, इसी लिए धातुओं का प्रयोग भी अभिलेखों के उत्कीर्ण के लिया किया जाता रहा है।

धातुओं अभिलेखों में अधिकतर तांबे व लोह का ही अधिक उपयोग होता रहा है। इसी लिए धातु अभिलेखों के लिए धातु स्तंभों, धातुपत्रों या धातु पट्टों, धातु प्रतिमाओं, धातु मोहरों या मुखौटों, धातु पात्रों, औजारों व अन्य ऐसी धातु की बनी वस्तुओं का उपयोग होता रहा है।

ऐसे ही कुछ धातु अभिलेख, जो कि प्रदेश से प्राप्त हुए हैं का विवरण जिले के अनुसार ही (जैसे कि पाषाण अभिलेखों के लिए पीछे आपकी सेवा में उल्लेख  किया था), प्रस्तुत किया जा रहा है। पाषाण अभिलेखों की तरह ही ताम्र (धातु) पट्ट या ताम्र पत्र अभिलेखों में भी चंबा, मण्डी, कांगड़ा ही कुछ आगे दिखते हैं।

तो सबसे पहले प्राप्त होने वाले धातु अभिलेखों के लिए चंबा को ही ले लेते हैं। इसमें भी विवरण का क्रम लगभग वैसा ही रहेगा अर्थात, अभिलेख नाम, श्रेणी, प्रकार, काल, लिपि, मिलने का स्थान व विवरण आदि।

ताम्र पट्ट अभिलेख चंबा

1.छतराड़ी देवी मंदिर अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु

अभिलेख प्रकार : प्रतिमा

अभिलेख।

अभिलेख काल : 7वीं – 8वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा, भाषा संस्कृत।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : छतराड़ी, चंबा।

अभिलेख विवरण : चंबा क्षेत्र के छतराड़ी गांव में बने लकड़ी (पहाड़ी शैली) के मंदिर में स्थापित देवी माता शक्ति की अष्ट धातु की खड़ी मुद्रा वाली लगभग 4.5 फुट ऊंची प्रतिमा की पीठिका के आधार पर उकेरे अभिलेख के अनुसार प्रतिमा बनवाने वाले उस समय के शासक मेरु वर्मन व बनाने वाले शिल्पी गुग्गा की जानकारी मिलती है।

2.लक्षणा देवी मंदिर अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख काल : 7वीं – 8वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा, भाषा संस्कृत।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : लक्षणा देवी मंदिर, भरमौर चंबा।

अभिलेख विवरण : चंबा, भरमौर के चौरासी मन्दिर परिसर में बने लकड़ी के इस बेहतरीन कारीगरी वाले मंदिर में स्थापित देवी महिषासुर मर्दनी की चतुर्भुजा अष्टधातु की प्रतिमा के आधारपीठ पर शारदा लिपि में उकेरे गए, 7वीं – 8वीं शताब्दी के अभिलेख से प्रतिमा व मंदिर के निर्माण करता शासक मेरु वर्मन व शिल्पी गुग्गा की जानकारी मिलती है।

  1. नरसिंह मंदिर अभिलेख ।

अभिलेख श्रेणी : धातु

अभिलेख प्रकार : प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख काल : 7वीं – 8वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : चौरासी मन्दिर परिसर, भरमौर चंबा।

अभिलेख विवरण : भरमौर के चौरासी मन्दिर परिसर में शिखर शैली के बने इस मंदिर का शिला शिल्प देखने योग्य है। मंदिर लक्षणा देवी के निकट व महेश मंदिर के सामने की ओर बना है। इसका निर्माण राजा साहिल वर्मन की पत्नी, रानी त्रिभुवन रेखा द्वारा करवाया गया था। जिसकी जानकारी भगवान नरसिंह की प्रतिमा की आधार पीठिका पर उकेरे गए शारदा लिपि के अभिलेख से हो जाती है।

4.गणेश मंदिर प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : प्रतिमा अभिलेख ।

अभिलेख काल : 7वीं – 8वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा ।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : चौरासी मन्दिर परिसर (गणेश मंदिर), भरमौर चंबा।

अभिलेख विवरण : भरमौर के चौरासी मन्दिर परिसर में, मुख्य प्रवेश द्वार के समीप बने (लकड़ी पत्थर से पहाड़ी शैली), इस मंदिर में देवी गणेश की अष्टधातु की प्रतिमा के आधारपीठ पर शारदा लिपि में उत्कीर्ण अभिलेख में प्रतिमा व मंदिर का निर्माण करवाने वाले शासक राजा मेरु वर्मन व शिल्पकार गुग्गा का भी उल्लेख किया गया है।

5.हरि राय मंदिर प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख काल : 11वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा व भाषा संस्कृत।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : हरि राय मंदिर, चंबा।

अभिलेख विवरण : भगवान विष्णु को समर्पित चंबा का शिखर शैली में बना हरि राय मंदिर चौगान मैदान के उत्तर की ओर एक कोने पर स्थित है। मंदिर के गर्भ गृह में अष्ट धातु से बनी भगवान विष्णु की (चतुर्भुजी- चतुर्मुखी वैकुंठ रूप), प्रतिमा जिसमें मानव, नरसिंह, वराह व कपिल के रूप दर्शाए गए हैं को अपने छः घोड़ों के रथ के साथ दिखाया गया है, स्थापित है। प्रतिमा में शारदा लिपि के संस्कृत में उत्कीर्ण किए अभिलेख से पता चलता है कि प्रतिमा व मंदिर का निर्माण उस समय के राजा सालवाहन द्वारा करवाया गया, जिसमें भगवान विष्णु की स्तुति के साथ साथ शासक द्वारा किए गए सामाजिक व धार्मिक कार्यों का भी उल्लेख मिलता है।

6.गौरी शंकर मंदिर प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख काल : 10वीं – 11वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा, भाषा संस्कृत।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : लक्ष्मी नारायण मंदिर, परिसर चंबा।

अभिलेख विवरण : शिखर शैली में बना गौरी शंकर मंदिर, जिसमें भगवान शिव व माता पार्वती की अष्ट धातु की प्रतिमा स्थापित है, का निर्माण चंबा के राजा युगांतर वर्मा द्वारा करवाया गया था। प्रतिमा का अभिलेख शारदा लिपि में संस्कृत के साथ उत्कीर्ण किया गया है। अभिलेख में भगवान गौरी शंकर की स्तुति, मंत्र ॐ नमो शिवाय, मंदिर के लिए दान करने वालों के नाम, कब और किस द्वारा मंदिर की स्थापना की गई आदि सभी जानकारियां दी गई हैं।

7.युगाकर वर्मन ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 10 वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : भूरी सिंह म्यूजियम, चंबा।

अभिलेख विवरण:धातु की तांबे की मोटी सी प्लेट जो कि लगभग 2-3 मि, मि, मोटी, 8- 9 इंच चौड़ी व 11-12 इंच लंबी होती हैं, इन्हीं को ताम्र पट्ट या पत्र अभिलेख कहलाते हैं।

इस ताम्र पट्ट अभिलेख को 940 ईस्वी में राजा युगाकार वर्मन पुत्र राजा साहिल वर्मन ने चंबा नगर में पानी की कमी को दूर करने के लिए जो रानी ने अपना बलिदान दिया था, उसी के संबंध (रानी सुनयना बलिदान के बारे) में जानकारी देते हुए भूमि दान, धार्मिक व सामाजिक कार्यों के वर्णन करते हुए, अपने संबंधित शासकों का भी उल्लेख किया है।

8.युगाकर वर्मन ताम्र पट्ट अभिलेख.II

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 10वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : भूरी सिंह म्यूजियम, चंबा।

अभिलेख विवरण : राजा युगाकर वर्मन के इस अभी लेख से पता चलता है कि, राजा द्वारा भूमि अनुदान देखकर भरमौर में नरसिंह के मंदिर का निर्माण करवाया था, जिसके निरीक्षण व देख भाल हेतु ही इस ताम्र पट्ट के अभिलेख में दिशा निर्देश दे कर जानकारी दी हुई है। यह ताम्र पट्ट अभिलेख भी अभी भी भूरी सिंह म्यूजियम चंबा में सुरक्षित है। इन्हीं ताम्र पट्ट अभिलेखों से शासकों की वंशावली, दान कर्ताओं व सभी गवाहों के नामों की जानकारी भी मिल जाती हैं।

9.गणेश वर्मन ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 16वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : टांकरी, बोली चम्बायाली।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : भूरी सिंह म्यूजियम, चंबा।

अभिलेख विवरण : राजा गणेश वर्मन (1512 ई. _ 1559 ई.) का यह ताम्र पट्ट अभिलेख भूरी सिंह म्यूजियम चंबा में देखा जा सकता है। ताम्र पट्ट अभिलेख के अनुसार, राजा गणेश वर्मन द्वारा किए गए धार्मिक अनुष्ठानों, पंडितो-पुजारियों को दी भूमि दान (कर मुक्त), प्रशासनिक व्यवस्था व वर्मन के स्थान पर सिंह लगने की नीति का चलन शुरू किया गया था। जो कि बाद में उसके पुत्र राजा प्रताप सिंह ने अपना लिया था। लेकिन उसके समय में राय व वर्मन दोनों ही उपनाम चलते रहे थे। राजा गणेश वर्मन के समय राजनीतिक स्थिरता, क्षेत्र विस्तार व पड़ोसियों से मित्रता पूर्ण संबंधों की भी जानकारी मिलती है।

10.कुल्लू चंबा संबंध ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 16वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : टांकरी, बोली पहाड़ी।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : भूरी सिंह म्यूजियम, चंबा।

अभिलेख विवरण : कुल्लू चंबा संबंध ताम्र पट्ट अभिलेख को, कुल्लू के राजा बहादुर सिंह द्वारा अपनी बेटी के वैवाहिक संबंधों की खुशी में राजा चंबा गणेश वर्मन के नाम जारी किया था। ताम्र पट्ट टांकरी लिपि से पहाड़ी बोली में उत्कीर्ण किया गया है। इसमें चम्बा के राजा गणेश वर्मन के राजगुरु पंडित रमापति को इस (वैवाहिक संबंध), शुभ कार्य को करवाने के उपलक्ष्य पर राजा कुल्लू, बहादुर सिंह द्वारा भूमि दान का उल्लेख व वैवाहिक संबंधों को बनाने की जानकारी भी मिलती है।

11.विदग्ध वर्मन सुगंल ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 10 वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा व टांकरी ।

प्राप्ति स्थान : भूरी सिंह म्यूजियम, चंबा।

अभिलेख विवरण : 10 वीं शताब्दी के इस ताम्र पट्ट अभिलेख को चंबा के राजा युगाकर वर्मन के पुत्र राजा विदग्ध वर्मन ने शारदा व टांकरी लिपि में उत्कीर्ण करवाया था। इस अभिलेख से चंबा राज्य के राजाओं की वंशावली के साथ ही साथ राजाओं के मुशना गोत्र की जानकारी भी मिलती है जो कि 10 वीं शताब्दी में राजा विदग्ध वर्मन के इस ताम्र पट्ट अभिलेख में वर्णित है।

12.जय स्तंभ अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : धातु स्तंभ अभिलेख।

अभिलेख काल : 7वीं – 8वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा, भाषा संस्कृत।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : चौरासी मन्दिर परिसर, भरमौर चंबा।

अभिलेख विवरण : लक्षणा देवी मंदिर व चौरासी मन्दिर परिसर, में माणि कणिका (लक्ष्मी नारायण) मंदिर के सामने एक पीतल के स्तंभ पर शारदा लिपि में उत्कीर्ण किए, इस अभिलेख को देखा जा सकता है। अभिलेख को राजा मेरु वर्मन द्वारा ही स्तंभ रूप में स्थापित करवाया था। स्तंभ अभिलेख में मेरु वर्मन के बेटे के बारे, दान करने वालों का उल्लेख, राज्य का परिचय, राजनीतिक व सामाजिक गतिविधियों की जानकारी आदि भी दी गई है।

13.राजा सोम वर्मन व आसत का ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 11वीं – 12वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा, भाषा संस्कृत।

प्राप्ति स्थान : भूरी सिंह म्यूजियम, चंबा।

अभिलेख विवरण : राजा सोम वर्मन व उसके भाई आसत वर्मन के इस ताम्र पट्ट अभिलेख में पता चलता है कि रानी राड़ा के पास जितनी भी अपनी संपत्ति थी, उसे उसने भूमि के दान में ही अर्पित कर दिया था ताकि दिवंगत आत्माओं को शांति मिल सके।

हिमाचल : पाषाण अभिलेख, संदर्भ बिलासपुर – डॉ. कमल के. प्यासा

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