हिमाचल : लेख/अभिलेखों वाले प्राचीन सिक्के भाग 2 गतांक से आगे

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डॉ. कमल के. प्यासा – मण्डी

यौद्धेय सिक्के :

8.सिक्के की धातु = ताम्र।

सिक्के का आकर = गोलाकार।

सिक्का का व्यास = 1.5 सै. मी

सिक्के की मोटाई = 0.5सै.मी.।

सिक्के का भार = 1.78 ग्राम।

सिक्के का काल : प्रथम – दूसरी श. ई . पू.।

सिक्के की लिपि = ब्राह्मी, भाषा संस्कृत।

सिक्का संग्रहकर्ता : स्व. चंद्र मणि कश्यप, मण्डी।

सिक्का का प्राप्ति स्थान : चक्कर, मण्डी।

सिक्के का विवरण : यौद्धे कालीन इस गोलाकार सिक्के की एक ओर छः मुखधारी कार्तिक स्वामी की आकृति दिखाई गई है, जिसके दाएं हाथ में भाला व बयां हाथ कमर पर रखे दिखाया गया है, इसके साथ ही साथ ब्राह्मी लिपि का लेख इस तरह से लिखा देखा गया है, “भगवतस्यअ सामिन ब्राह्मणयादेवस्या कुमारस्या”,लेकिन यह लिखा कुछ स्पष्ट नहीं दिखाई देता। इसी सिक्के के दूसरी ओर छः सिरों वाली देवी को खड़ी मुद्रा में दिखाया गया है, इसके साथ ही साथ एक छः चापों वाली पहाड़ी को छतरी के साथ दिखाया गया है। देवी के बाईं ओर नंदीपद और दाईं ओर एक वृक्ष की आकृति उकेरी हुई है। इसी तरह के कई ओर सिक्के भी देखे गए हैं।

जनजातीय या कबायली सिक्के :

9.सिक्के की धातु = ताम्र।

सिक्के का आकार = गोलाकार।

सिक्के का व्यास = 2.1 सै.मी.।

सिक्के की मोटाई = 0.15 सै.मी.।

सिक्के का भार = 4.72 ग्राम।

सिक्के का काल = दूसरी – तीसरी शताब्दी।

सिक्के पर लिखी लिपि नहीं है।

सिक्के की पंजीकरण संख्या = एम. आई. डी./एच.पी.493.

संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा (अपने संग्रह से), परूथी संग्रहालय, मण्डी।

प्राप्ति स्थान : मण्डी से खरीदे गए।

सिक्के का विवरण = इस कबायली सिक्के के एक ओर साधारण मानव रूपी आकृति खड़ी मुद्रा में दिखाई गई है, जिसकी भुजाएं ऊपर की ओर हैं, फिर इसी आकृति के ऊपर एक अन्य पड़ी हुई आकृति इसी मुद्रा में दिखाई गई है। सिक्के के दूसरी ओर एक या दो चंद्रमाओं वाली जोत खड़ी मिलती हैं, लेकिन सिक्के के ऊपर कोई भी लेख नहीं मिलता। बहुत से शेष सिक्के भी ऐसे ही हैं।

10.सिक्के की धातु = ताम्र।

सिक्के का आकार = गोलाकार।

सिक्के का व्यास = 1.9 सै. मी.।

सिक्के की मोटाई = 0.15 – 0.2 सै.मी.।

सिक्के का भार = 4.7 ग्राम।

सिक्के का काल = पहली व दूसरी शताब्दी।

सिक्का की लिपि = ब्राह्मी लिपि के चिन्ह।

सिक्के की पंजीकरण संख्या = एम. डी. आई./एच.पी.495

संग्रहकर्ता = स्व. गुरचरण लाल एडवोकेट (बड़े भाई)। परूथी संग्रहालय, मण्डी।

प्राप्ति स्थान : मण्डी।

सिक्के का विवरण : इस जनजातीय सिक्के के एक ओर साधारण मानव आकृति को भुजाएं ऊपर किए दिखाया गया है, जैसे कि अन्य इस प्रकार के सिक्कों में देखा जा सकता है। इसी सिक्के के दूसरी ओर ब्राह्मी लिपि जो चिह्न या अक्षर मिलते हैं वो इस प्रकार से हैं:स्वास्तिक चिन्ह, T, + व घास का चिन्ह मिलता है। इनके संग्रह में ऐसे अन्य सिक्के भी देखे गए हैं।

वृषभ अश्व /बैल घोड़े वाले सिक्के:

इस प्रकार के सिक्के कई एक शासकों द्वारा जारी किए गए हैं। गुप्त काल में स्कन्द गुप्त (455_467 ईस्वी) से आगे नौवीं शताब्दी में काबुल के शाही वंश द्वारा भी इस प्रकार के सिक्कों का चलन जारी रखा गया था। आगे 12 वीं – 13 वीं शताब्दी तक तो इस प्रकार के चांदी तांबे व मिश्रित धातु के सिक्के कई एक वंशों द्वारा चलाए गए। तोमर शासकों द्वारा 10वीं से 12वीं शताब्दी तक व प्रतिहारों ने 13 वीं शताब्दी तक तथा दिल्ली के शासक मुहम्मद बिन साम (मुहम्मद गौरी) ने भी इन सिक्कों के चलन को जारी रखा था। 14वीं शताब्दी में इस तरह के सिक्कों का चलन इधर पहाड़ी क्षेत्र कांगड़ा में भी हो गया और इधर 17 वीं शताब्दी के शुरू तक यह क्रम चलता रहा।

11.सिक्के की धातु = ताम्र।

सिक्के का आकर = गोलाकार।

सिक्के का व्यास = 1.5 सै. मी.।

सिक्के की मोटाई = 0.15 सै.मी.।

सिक्के का भार = 3.4 ग्राम।

सिक्के काल = 14वीं – 17वीं शताब्दी।

सिक्के के लेख की लिपि = नगरी ।

सिक्का संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा (अपने संग्रह से )परूथी संग्रहालय, मण्डी।

सिक्के का प्राप्ति स्थान = मण्डी।

सिक्के का विवरण = इस बैल व घोड़े वाले सिक्के के एक ओर अधूरी बैल की आकृति दिखाई देती है,जिसके ऊपर की ओर “अष या मरी तपाल “नगरी लिपि में लिखा मिलता है।

सिक्के के दूसरी ओर अस्पष्ट घुड़सवार की आकृति मिलती है, शेष कुछ लिखा नहीं है। इस तरह के कई एक तांबे के सिक्के संग्रह में हैं।

12.सिक्के की धातु = मिश्रधातु (तांबा व चांदी)।

सिक्के का आकर = गोलाकार।

सिक्के का व्यास = 1.45 सै.मी.।

सिक्के की मोटाई =.15 – 2सै . मी।

सिक्के का भार = 3.50 ग्राम।

सिक्के का काल = 14वीं – 17वीं शताब्दी।

सिक्के के लेख की लिपि = नगरी।

सिक्का संग्रहकर्ता=कमल के.  प्यासा (अपने संग्रह से) ।परूथी संग्रहालय, मण्डी।

सिक्का प्राप्ति स्थान=मण्डी।

सिक्का विवरण = बैल घोड़े वाले इस सिक्के के एक ओर अपूर्ण बैल की आकृति व ऊपर की ओर नगरी लिपि में शायद “अष्ट पाल या अमृत पाल “जैसा पढ़ने को मिलता है। सिक्के के दूसरी तरफ कुछ स्पष्ट नहीं है।

आहत या पंच मार्क सिक्के:

आहत का अर्थ वैसे तो चोट होता है। इसी प्रकार वह सिक्का जिसको चोट मार कर या जोर से दबा कर बनाया जाता था उसे आहत सिक्के के नाम से जाना जाता था। शुरू शुरू में धातु के टुकड़ों को काट कर उन पर आहत (जोर से दबा कर) द्वारा, निशान बनाए जाते थे और इसी लिए इस प्रकार के सिक्कों को आहत या पंच मार्क सिक्कों के नाम से जाना जाता है। इन आहत सिक्कों पर बने निशान, सूर्य, चन्द्रमा, हाथी,मछली, पत्ता, फूल, चक्कर आदि देखने को मिलते हैं। और इन निशानों के अतिरिक्त कोई भी अभिलेख व जारी करने वाले शासक आदि की जानकारी नहीं मिलती।

इन सिक्कों में तांबे,चांदी व मिश्र धातु के, किसी भी आकर के आहत सिक्के आ जाते हैं, जो कि सबसे प्राचीन होते हैं।

13.सिक्के की धातु = चांदी।

सिक्के का आकर = पंचभुजाकार।

सिक्के की भुजाएं = 1.2, 0.9, 1.4, 0.4, 0.3 व 0.6 सै. मी.।

सिक्के की लम्बाई = 1.5 सै.मी.।

सिक्के की चौड़ाई = 0.8 सै.मी.के लगभग।

सिक्के की मोटाई = 0.25 सै.मी.।

सिक्के का भार = 3.95 ग्राम।

सिक्के का काल = छठी शताब्दी ई ०पू०, दूसरी शताब्दी ई ०पू०।

सिक्का संग्रहकर्ता:स्व. श्री चंद्र मणि कश्यप, मण्डी।

सिक्का प्राप्ति स्थान : मण्डी।

सिक्का विवरण = इस पंच भुज आहात सिक्के के चिन्ह स्पष्ट नहीं दिखाई देते।

14.सिक्के की धातु = चांदी।

सिक्के का आकर = अपूर्णगोल।

सिक्के का व्यास = सै. मी.।

सिक्के की मोटाई = 0.15 सै.मी.

सिक्के का भार = ग्राम

सिक्के का काल = छठी शताब्दी ई ०पू० से दूसरी शताब्दी ई ०पू०।

सिक्का संग्रहकर्ता = डॉ. कमल के. प्यासा (अपने संग्रह से), परूथी संग्रहालय, मण्डी।

प्राप्ति स्थान=मण्डी।

सिक्के का विवरण = मण्डी से प्राप्त इस चांदी के आहत वाले सिक्के पर    निशानों को देखा जा सकता है।

14.सिक्के की धातु = चांदी।

सिक्के का आकर = आयताकार।

सिक्के की भुजाएं = 1.4 सै.मी.X 0.55 सै.मी.।

सिक्के की मोटाई = 0.15 सौ.मी.।

सिक्के का भार = 3.5 ग्राम।

सिक्के का काल = छठी शताब्दी ई ०पू० से दूसरी शताब्दी ई ०पू०।

सिक्का संग्रहकर्ता = स्व. श्री चंद्र मणि कश्यप, मण्डी।

सिक्के का प्राप्ति स्थान = मण्डी।

सिक्के का विवरण = चांदी के आहत वाले इस सिक्के के एक ओर पांच अलग अलग चिन्ह मिलते हैं जो कि किरणों वाला सूर्य, गमले में लगा पौधा, चपटी किरणों वाला चक्र, पांच अर्धवृतों वाली पहाड़ी व कुछ अन्य(?) हैं। सिक्के के दूसरा पट सपाट है।

14.सिक्के की धातु = चांदी।

सिक्के का आकार = आयता कार।

सिक्के आयात की भुजाएं = 1.5सै .मी.X 1.5 सै. मी.।

सिक्के की मोटाई = 0.15 सै.मी.।

सिक्के का भार= 3.80 ग्राम।

सिक्के का काल = छठी शताब्दी ई ०पू० से दूसरी शताब्दी ई ०पू०।

सिक्का संग्रहकर्ता = स्व. श्री चंद्र मणि कश्यप, मण्डी।

सिक्का प्राप्ति स्थान=मण्डी।

सिक्का विवरण = चांदी के आयताकार आहत वाले इस सिक्के के एक ओर केवल सूर्य की किरणों वाला गोल चक्र व चिड़ी के पत्ते का ही चिन्ह देखने को मिलता है। सिक्के के दूसरी ओर कुछ स्पष्ट नहीं है।

चुनाव का दंगल (कविता) – डॉ. कमल के. प्यासा

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