April 1, 2026

मेरा भारत महान – रणजोध सिंह

Date:

Share post:

रणजोध सिंह – नालागढ़

गीता यहां, कुरान यहां

बाइबल और ग्रंथ साहिब भी

साथ-साथ यहाँ रहते हैं|

बेशक भिन्न वेश-भूषायें हैं,

बोलियां भी अपनी भिन्न है

फिर भी हर सुख-दुःख,

हम मिलजुल कर सहते हैं|

यूं ही नहीं !

मेरे देश को प्रेम की धरती कहते हैं|

 

सर्दी यहाँ, गर्मी यहाँ

बसंत यहाँ, शरद यहाँ

कभी रिमझिम मेघ बरसते हैं|

सागर यहाँ, पर्वत यहाँ

नदियाँ यहाँ, झरने यहाँ

लहके-दहके खेत, हर मौसम सोना उगलते हैं|

यूं ही नहीं !

मेरे देश को सोने की चिड़िया कहते हैं|

 

क्या चीन, क्या जापान

क्या इटली, क्या अमेरिका

सब भारत में सेध लगाते हैं|

योग यहाँ, अध्यात्म यहाँ

समस्त विश्व में भारतवासी

सबको गले लगाते हैं|

यूं ही नहीं !

मेरे देश को विश्व गुरु कहते हैं|

 

आक्रमण मेरे देश का

दस्तूर नहीं हरगिज

दुश्मन का हर नखरा

बड़े शोक से सहते हैं|

पर जब कोई अमन-शान्ति को,

कायरता समझने लगते हैं

जब ज़ेर-ओ-ज़बर के पानी,

सर से गुजरने लगते हैं|

फिर प्राणों की चिंता हम नहीं करते

दुश्मन से दुश्मन की भाषा में बातें करते हैं|

यूं ही नहीं !

मेरे देश को वीरों की धरती कहते हैं|

ग़ज़ल – रणजोध सिंह

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

Related articles

Governor Stresses Transparency, Sustainability

Principal Accountant General (Accounts & Entitlement) Sushil Thakur, along with Principal Accountant General (Audit) Purushottam Tiwari, called on...

This Day in History

1933 Nazi Germany bars Jewish citizens from working in the civil service. 1933 The Gestapo (secret state police) is established by...

जयराम ठाकुर : कैंसर इलाज पर मुख्यमंत्री का बयान निंदनीय

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विधान सभा में स्वास्थ्य के स्थगन प्रस्ताव पर बोलने के...

International Data Gap Hits Forest Corp Profits

Himachal Pradesh State Forest Development Corporation is reportedly incurring a recurring annual loss of Rs 2.31 crore in...