प्रकृति, कला वीथिका और कविता… — लिट्रेचर विद नेचर

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आत्मा रंजन, शिमला

रविवार का दिन “लिट्रेचर विद नेचर” के उत्साही मित्रों के साथ गुजरा। चार सृजन संस्थाओं कीकली चेरिटेबल ट्रस्ट, शिमला वॉक्स, कवि कुंभ और पोएटिक आत्मा के संयोजन में “लिट्रेचर विद नेचर” के बैनर और मुहिम के तहत एक उम्दा सृजन यात्रा और कवि गोष्ठी का आयोजन। प्रकृति के सानिध्य में करीब पच्चीस लेखकों और संस्कृति कर्मियों का दल समरहिल से पॉर्टर्स हिल, चेडविक फॉल होते हुए, देवदार, चीड़, बान के घने जंगलों के बीच से करीब पांच किलोमीटर पैदल सफर तय कर हियूंण गांव स्थित चटर्जी आर्ट गैलरी पहुंचा, रास्ते भर सृजन और कलाओं पर व्यापक संवाद करते हुए।

संवाद में शामिल रहीं वन्य जीवों की कुछ मधुर पुकार गुंजारें, कलरव, चहचहाहटें…। इन जीवों और वनस्पतियों को लेकर भी व्यापक बातचीत हो रही थीं। चेड़विक फॉल की खूबसूरती ने सबको आकर्षित अचंभित किया, तो पानी में ऊपर की बस्तियों से घुलकर आते प्रदूषण की बदबू ने सबको आहत भी किया।

सीताराम शर्मा सिद्धार्थ जी ने तुरन्त प्रस्तावित किया कि इस संदर्भ में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लिखित में भेजा जाएगा। इस तरह पहुंचे धरोहर गांव के रूप में घोषित हियूंण गांव। प्राचीन काल की एक लोक कथा सुनते हुए भी कि एक राक्षस के आतंक और प्रताड़ना से यहां के इष्ट देवों नाग और गण देवता ने मुक्त किया था गांव वासियों को। राक्षस को चेडविक फॉल की विशाल शिला में तब्दील करते हुए।

हियूंण गांव — जहां स्थित है चटर्जी कला दीर्घा। इसी कलादीर्घा के प्रांगण में तय था कवि गोष्ठी का आयोजन। बंगाल स्कूल परम्परा के ख्यात चित्रकार प्रो. हिम कुमार चटर्जी के शानदार सानिध्य और आतिथ्य में। चटर्जी जी ने अपनी और उनके पिता श्री सनत कुमार चटर्जी जी की कला साधना और कला यात्रा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। इन दिनों उनकी रेसीडेंसी में सृजनरत नब्बे वर्षीय ख्यात चित्रकार और कवि वाणी प्रसन्ना भी सपत्नीक इस संवाद में शामिल हुए और कविता पाठ भी किया।

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वहीं सात वर्षीय बालिका कवि वैराही ठाकुर निराला ने भी अपनी कविता पढ़कर सबका मन मोहा। कवि गोष्ठी में करीब पच्चीस कवियों ने अपनी ताज़ा रचनाएं प्रस्तुत की। कवि गोष्ठी में कविता पाठ किया गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय, ओम प्रकाश शर्मा, भारती कुठियाला, मोनिका छट्टू, नरेश देयोग, रमेश ढढ़वाल, सुमित राज, स्नेह नेगी, गुलपाल वर्मा, सीताराम शर्मा सिद्धार्थ, मधु कात्यायनी, लेखराज चौहान, राधा सिंह, राकेश भारद्वाज, यादव शर्मा, नाशि चौहान आदि कवियों ने।

कविताओं पर कुछ संवाद करना भी प्रीतिकर रहा। शायर और अंग्रेजी कथाकार सुमित राज जी के संयोजन में (वंदना भागडा के सहयोग सहित), यह आयोजन प्रकृति के सानिध्य में कला और कविता की जुगलबंदी का एक शानदार आयोजन रहा।

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