मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि अब उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली स्टाफ नर्सों को पहले की तरह 40 प्रतिशत नहीं बल्कि पूरा वेतन दिया जाएगा। उन्होंने यह घोषणा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (आईजीएमसी) शिमला में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए की। इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा विभाग में 80 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया अगले महीने से शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगले एक वर्ष में प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधार देखने को मिलेंगे और आने वाले वर्षों में रोजगार के कई नए अवसर भी सृजित होंगे।
उन्होंने बताया कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी सिस्टम और अत्याधुनिक एमआरआई मशीनें स्थापित की जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य आउटसोर्स आधार पर होने वाली नियुक्तियों को समाप्त करना है, क्योंकि इससे युवाओं का शोषण होता है। रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए नियमित स्टाफ नर्स पदों के साथ-साथ सहायक स्टाफ नर्स के नए पद भी सृजित किए जाएंगे और नर्सों की भर्ती बैच-वाइज की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के विदेश रोजगार को व्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकार ने विदेशी भर्ती विभाग भी स्थापित किया है, जो विदेश जाने वाले युवाओं का पूरा रिकॉर्ड रखेगा।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं में 57.5 प्रतिशत निर्वाचित प्रतिनिधि महिलाएं हैं, जो राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। हिमाचल की बेटियां हर क्षेत्र में मेहनत के दम पर निरंतर आगे बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को वर्ष 1952 से यह अनुदान मिल रहा था, लेकिन भारत के वित्त आयोग के 16वें वित्त आयोग द्वारा इसे बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ा है, क्योंकि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के पास सीमित संसाधन हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को बिजली परियोजनाओं से 50 प्रतिशत रॉयल्टी मिलनी चाहिए, ताकि प्रदेश के लोगों को उनका उचित अधिकार मिल सके।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर नर्सिंग स्कॉलर सोसायटी को 5 लाख रुपये की अनुदान राशि देने की भी घोषणा की।



