Tag: रणजोध सिंह

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ग़ज़ल – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ मुझे जख्म देने वाले जाने पहचाने हैं फूल के दर्द से भक्त लोग अनजाने हैं|   वो बीच बाजार रोंद देता है मासूम कलियों...

वह हँसती क्यों है? – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ हर समय खिल-खिलाने वाली नंदिनी के बारे में कॉलोनी के लोग इतना ही जानते थे कि वह एक निजी कम्पनी में...

काली बिल्ली – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह -  नालागढ़ उसे दिन मुझे नालागढ़ से अस्सी किलोमीटर दूर सोलन शहर में बस द्वारा एक आवश्यक मीटिंग में पहुंचना था| घर से...

शर्तिया ईलाज़ (व्यंग्य) – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ बुत-तराश ने मुस्कान को भरपूर समय दे कर गढ़ा था। रूप यौवन के साथ-साथ वह एक कोमल ह्रदय की स्वामी भी...

संयोगवश मित्रता (संस्मरण) — रणजोध सिंह

रणजोध सिंह दोस्तों अभी तक आपने अनेक कहानियां सुनी होगी, जिनमें लोग जमीन के एक-एक इंच के लिए लड़ते हैं| कभी सांझी दीवार को लेकर...

जड़ों का दर्द – रणजोध सिंह

महकते हुए हसीं गुल ने अपनी जड़ों से पूछातुम्हारा वजूद क्या है?जवां बेटे ने अपने बुड़े बाप से पूछाआपने मेरे लिए किया क्या है|? दरिया...

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