तकनीक से सशक्तिकरण का दशक – अन्नपूर्णा देवी

Date:

Share post:

अन्नपूर्णा देवी – केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री

सशक्तिकरण की शुरुआत पहुँच – अधिकारों, सेवाओं, सुरक्षा और अवसरों तक पहुँच से होती है । बीते दशक में, अधिक समावेशी और डिजिटल रूप से सशक्त भारत का निर्माण करने पर केंद्रित मोदी सरकार की प्रतिबद्धता के माध्यम से इस पहुँच को नए सिरे से परिभाषित किया गया है और सभी के लिए सुलभ बनाया गया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इस परिवर्तन में सबसे अग्रणी रहा है। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के विकसित भारत @2047 के विजन से निर्देशित, मंत्रालय ने लाभ को अंतिम छोर तक त्‍वरित, पारदर्शी और कुशल तरीके से पहुँचाना सुनिश्चित करने के लिए अपने कार्यक्रमों में प्रौद्योगिकी को व्यवस्थित रूप से एकीकृत किया है।

हम अक्सर कहते हैं: “सशक्त महिलाएँ, सशक्त भारत।” और सशक्तिकरण की शुरुआत – अधिकारों, सेवाओं, सुरक्षा और अवसरों तक पहुँच से होनी चाहिए । आज, यह पहुँच तेज़ी से डिजिटल होती जा रही है।

जो कभी आकांक्षापूर्ण था, वह अब क्रियाशील बन चुका है–ऐसा  सरकार द्वारा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, रियल-टाइम डेटा सिस्टम और उत्तरदायी शासन पर ज़ोर दिए जाने की बदौलत संभव हुआ है।

मंत्रालय ने देखरेख, संरक्षण और सशक्तीकरण पर दृढ़ता से ध्यान केंद्रित करते हुए -पोषण, शिक्षा, कानूनी सुरक्षा और आवश्यक अधिकारों तक पहुँच को मजबूत किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिलाएं और बच्चे न केवल अधिक स्वस्थ, अधिक सुरक्षित जीवन जी सकें, बल्कि वे आत्मविश्वासी नेतृत्‍वकर्ता और अमृत काल के परिवर्तनकर्ता के रूप में भी उभर सकें।

जैसा कि माननीय प्रधानमंत्री ने बहुत सटीक रूप से कहा है, “मैं प्रौद्योगिकी को सशक्त बनाने के साधन के रूप में तथा आशा और अवसर के बीच की दूरी को पाटने वाले उपकरण के रूप में देखता हूँ। इस लोकाचार ने मैनुअल प्रक्रियाओं से लेकर रियल-टाइम डैशबोर्ड तक, असंबद्ध  योजनाओं से लेकर एकीकृत प्लेटफार्मों तक हमारे परिवर्तन का मार्गदर्शन किया है।

इस परिवर्तन की आधारशिला सक्षम आंगनवाड़ी पहल है। भारत भर में 2 लाख से ज़्यादा आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक और सशक्त बनाने के लिए निरुपित यह कार्यक्रम बाल्‍यावस्‍था देखरेख और विकास की अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। पोषण, स्वास्थ्य सेवा और पूर्व-विद्यालयी शिक्षा सेवाओं की ज़्यादा प्रभावी प्रदायगी संभव बनाते हुए इन केंद्रों को स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल डिवाइस और नए-नए लर्निंग टूल्स के साथ अपग्रेड किया जा रहा है।

देश भर में 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं को पोषण ट्रैकर के साथ एकीकृत करने से रियल-टाइम डेटा एंट्री, कार्य निष्‍पादन की निगरानी और साक्ष्य-आधारित नीतिगत हस्तक्षेप संभव हो पाया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन और व्यापक प्रशिक्षण से लैस करके, यह पहल अंतिम छोर तक गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदायगी सुनिश्चित करती है। यह 2014 से पहले मौजूद मैनुअल रिकॉर्ड-कीपिंग और डेटा ब्लाइंड स्पॉट से एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है।

एक दशक पहले, आईसीडीएस प्रणाली असंबद्ध डेटा, विलंबित प्रतिक्रियाओं और रियल-टाइम  ट्रैकिंग की कमी से दबी हुई थी। पोषण ट्रैकर ने – पोषण सेवा प्रदायगी में सटीकता, दक्षता और जवाबदेही की शुरुआत कर इस परिदृश्य को बदल दिया है ।

10.14 करोड़ से ज़्यादा लाभार्थी अब इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हैं- जिनमें गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ, छह साल से कम उम्र के बच्चे और किशोरियाँ शामिल हैं। यह प्‍लेटफॉर्म विकास की निगरानी और पूरक पोषण प्रदायगी पर रियल-टाइम अपडेट को सक्षम बनाते हुए समय पर हस्तक्षेप और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण सुनिश्चित करता है। डिजिटल रूप से सशक्त सामुदायिक केंद्रों के रूप में आंगनवाड़ी केंद्रों की नए सिरे से परिकल्पना कर, शहरी-ग्रामीण विभाजन को पाटते हुए- पोषण ट्रैकर महत्‍वपूर्ण रूप से स्वस्थ भारत, सुपोषित भारत के राष्ट्रीय विजन को आगे बढ़ा रहा है।

लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार (2025) से सम्मानित यह मंच ‘पोषण भी पढाई’ का भी समर्थन करता है, जो प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्रशिक्षण मॉड्यूल प्रदान करते हुए विकसित भारत के अमृत काल में समग्र देखभाल को बढ़ावा दे रहा है।

पूरक पोषण कार्यक्रम (एसएनपी) में पारदर्शिता को और मजबूत करने तथा लीकेज कम करने के लिए एक फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम शुरू किया गया है। इस डिलिवरी तंत्र को सुरक्षित, सटीक और सम्मानजनक बनाते हुए यह सुनिश्चित करता है कि पोषण सहायता केवल पात्र लाभार्थियों को ही मिले।

प्रौद्योगिकी-आधारित प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से यहमंत्रालय पोषण से बढ़कर, महिलाओं के लिए सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित कर रहा है। शी-बॉक्स पोर्टल हर महिला को, चाहे वह किसी भी रोजगार की स्थिति में हो या संगठित या असंगठित, निजी या सार्वजनिक क्षेत्र में काम करती हो, पॉशअधिनियम के तहत उसे शिकायत दर्ज कराने के लिए सिंगल-विंडो एक्सेस प्रदान करता है – जिससे ऑनलाइन निवारण और ट्रैकिंग संभव हो पाती है। इस बीच, मिशन शक्ति डैशबोर्ड एंड मोबाइल ऐप संकट से घिरी महिलाओं को एकीकृत सहायता प्रदान करता है, उन्हें निकटतम वन स्टॉप सेंटर से जोड़ता है – जो अब लगभग हर जिले में चालू है। ये कदम इस बात का उदाहरण हैं कि तकनीक का उपयोग न केवल दक्षता के लिए, बल्कि न्याय, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए भी किया जा रहा है।

एक दशक पहले, मातृत्व लाभ की निगरानी करना मुश्किल था और इसमें देरी होती थी। मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) की शुरूआत की है – जो मातृ कल्याण की दिशा में बहुत बड़ा बदलाव है। पीएमएमवीवाई नियम, 2022 के तहत, गर्भवती महिलाओं को उनके पहले बच्चे के लिए 5,000 रुपये की राशि मिलती है । मिशन शक्ति के तहत, अगर दूसरा बच्चा लड़की है, तो – बेटियों के लिए सकारात्मक सुदृढ़ीकरण को बढ़ावा देते हुए लाभ की राशि 6,000 रुपयेतक बढ़ जाती है। कागज रहित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से वितरित, शुरुआत से अब तक 4 करोड़ से अधिक महिला लाभार्थियों तक 1,9000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहुँच चुकी है।

पीएमएमवीवाई – आधार-आधारित प्रमाणीकरण, मोबाइल-आधारित पंजीकरण, आंगनवाड़ी/आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर सहायता और रियल-टाइम डैशबोर्ड का लाभ उठाते हुए एक पूर्णतः डिजिटल कार्यक्रम है। एक समर्पित शिकायत निवारण मॉड्यूल तथा पारदर्शिता, विश्वास और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला नागरिकों से संबंधित पोर्टल  है – जो बेटी बचाओबेटी पढ़ाओ के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

ये लक्षित प्रयास ठोस नतीजे दे रहे हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) की स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एच एम आई एस) की नवीनतम रिपोर्ट से पता चलता है कि जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) 918 (2014-15) से बढ़कर 930 (2023-24) हो गया है, जिसमें 12 अंकों का शुद्ध सकारात्मक परिवर्तन हुआ है। मातृ मृत्यु दर 130 प्रति 1000 जन्म (2014-16) से घटकर 97 प्रति 1000 जन्म (2018-20) हो गई है – जो हमारी सरकार के पिछले एक दशक के निरंतर प्रयासों के सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित करता है।

प्रत्‍येक बच्‍चा पोषित, सुरक्षित और संरक्षित वातावरण का हकदार है। हाल के वर्षों में, डिजिटल परिवर्तन ने बाल संरक्षण और कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। किशोर न्याय अधिनियम के तहत, मंत्रालय ने केयरिंग्सपोर्टल (बाल दत्तक ग्रहण संसाधन सूचना एवं मार्गदर्शन प्रणाली) के माध्यम से गोद लेने के इकोसिस्‍टम को मजबूत किया है। यह डिजिटल इंटरफ़ेस एक अधिक पारदर्शी, सुलभ और कुशल गोद लेने की प्रक्रिया सुनिश्चित करता है।

डिजिटलीकरण ने बाल देखभाल संस्थानों, पालन-पोषण केंद्रों और जेजे अधिनियम के तहत वैधानिक सहायता संरचनाओं की निगरानी में भी सुधार किया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा विकसित प्लेटफॉर्म बाल अधिकारों के उल्लंघन पर सक्रिय रूप से नज़र रख रहे हैं। इस बीच, मिशन वात्सल्य डैशबोर्ड विभिन्न बाल कल्याण हितधारकों के बीच अभिसरण और समन्वय को मजबूत करता है।

यह नया भारत है – जहाँ शासन प्रौद्योगिकी से मिलता है, और जहाँ नीति उद्देश्य से मिलती है। पिछले दशक में, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के ओजस्‍वी नेतृत्व में, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने न केवल डिजिटल परिवर्तन को अपनाया है – बल्कि इसका समर्थन भी किया है।

जैसे-जैसे हम अमृत काल में आगे बढ़ रहे हैं, मंत्रालय प्रत्येक महिला और प्रत्येक बच्चे का राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनना सुनिश्चित करते हुए आगे बढ़कर नेतृत्व करना जारी रखेगा। प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और लक्षित कार्रवाई के माध्यम से, हम एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रहे हैं जहाँ सशक्तिकरण महज नारा भर नहीं है – बल्कि प्रत्येक भारतीय के लिए वास्तविकता है।

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

Keekli Bureau
Keekli Bureau
Dear Reader, we are dedicated to delivering unbiased, in-depth journalism that seeks the truth and amplifies voices often left unheard. To continue our mission, we need your support. Every contribution, no matter the amount, helps sustain our research, reporting and the impact we strive to make. Join us in safeguarding the integrity and transparency of independent journalism. Your support fosters a free press, diverse viewpoints and an informed democracy. Thank you for supporting independent journalism.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related articles

Sacred Heart Convent School Sparkles with Excellent CBSE XII Results

Sacred Heart Convent School, Dhalli has once again showcased its academic brilliance by delivering an exceptional performance in...

Chapslee School Students Shine Bright in CBSE Class XII Exams 2026

Chapslee School, Bharari, has once again reaffirmed its tradition of academic excellence by delivering an exceptional performance in...

हिमाचल : लेख/अभिलेखों वाले प्राचीन सिक्के (विशेष रूप से मण्डी क्षेत्र से प्राप्त) – डॉ. कमल के. प्यासा

डॉ. कमल के. प्यासा - मण्डी ताम्र पट्ट अभिलेखों के पश्चात हिमाचल से प्राप्त होने वाले सिक्कों से मिलने...

IIAS Shimla decodes OTT boom in global entertainment lecture

Indian Institute of Advanced Study (IIAS), Rashtrapati Nivas, hosted a compelling special lecture on “The Expanding Scope of...