हिमाचल के प्राचीन कुषाण सिक्के

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 डॉ. कमल के. प्यासा – मण्डी

कुषाण कालीन सिक्के हिमाचल में मण्डी के अतिरिक्त कांगड़ा के कानिहारा व ज्वालामुखी, शिमला के सराहन, सोलन के कालका- कसौली मार्ग व हमीरपुर के टप्पा व मेवा क्षेत्र से प्राप्त हो चुके हैं। शेष हिमाचल के साथ लगते दूसरे प्रांतों, जिनमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब व हरियाणा आदि आते हैं, से भी भारी संख्या में कुषाण सिक्के प्राप्त हो चुके हैं।

हिमाचल से प्राप्त हुए कुषाण सिक्कों का विस्तार से वर्णन उनकी प्राप्ति व संग्रहकर्ता के नाम आदि के साथ इस प्रकार से किया गया है:

मण्डी क्षेत्र से प्राप्त सिक्के:

कुषाण कालीन:

1.
सिक्के की धातु = ताम्र।
सिक्के का आकार = गोलाकार।
सिक्के का व्यास = 2.5 सै.मी.।
सिक्के की मोटाई = 0.4 सै.मी.।
सिक्के का भार = 14.9 ग्राम।
सिक्के का काल = कुषाण कालीन (द्वि. शत. ई.पू.)।
सिक्के की लिपि = अस्पष्ट बैक्ट्रीयन लिपि।
सिक्का पंजीकरण संख्या = एम.डी.आई./एच.पी. 456।
संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा (अपने संग्रह से), परूथी संग्रहालय, मण्डी।
प्राप्ति स्थान = चक्कर, मण्डी।
सिक्के का विवरण = इस सिक्के के एक ओर खड़ी मुद्रा में मानव आकृति दिखाई गई है। दूसरी ओर की आकृति के साथ नंदी को दिखाया गया है। लेख स्पष्ट नहीं दिखाई देता और यह सिक्का कुषाण कालीन है।

2.
सिक्के की धातु = ताम्र।
सिक्के का आकार = गोलाकार।
सिक्के का व्यास = 1.9 सै.मी.।
सिक्के की मोटाई = 0.25 सै.मी.।
सिक्के का भार = 6 ग्राम।
सिक्के का काल = दूसरी श. ई.पू.।
सिक्का लेख लिपि = अस्पष्ट बैक्ट्रीयन।
सिक्का पंजीकरण संख्या = एम.डी.आई./एच.पी./459।
संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा, परूथी संग्रहालय, मण्डी।
प्राप्ति स्थान = चक्कर, बाजार से खरीदा गया।
सिक्का विवरण = कुषाण कालीन इस सिक्के के एक ओर लंबा-सा कोट धारण किए खड़ी मानव आकृति दिखाई गई है, जिसके दाएं हाथ में कमंडल है तथा बाईं ओर सब कुछ अस्पष्ट है। सिक्के के दूसरी तरफ भी सब कुछ अस्पष्ट ही है।

3.
सिक्का धातु = ताम्र।
सिक्का आकार = गोल।
सिक्का व्यास = 2.0 सै.मी.।
सिक्का मोटाई = 0.15 से 0.25 सै.मी.।
सिक्का भार = 5.8 ग्राम।
सिक्का काल = दूसरी श. ई.पू.।
सिक्का लिपि = अस्पष्ट बैक्ट्रीयन।
सिक्का पंजीकरण संख्या = एम.आई.डी./एच.पी./457।
सिक्का संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा, परूथी संग्रहालय, मण्डी।
सिक्का प्राप्ति स्थान = चक्कर, मण्डी, बाजार से खरीदा गया।
सिक्का विवरण = सिक्के के एक ओर खड़ी मानव आकृति के हाथ में कुछ पकड़ा हुआ है, जो स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर आसन मुद्रा में बैठी (महात्मा बुद्ध) आकृति दिखाई गई है। तांबे का यह सिक्का भी कुषाण कालीन ही है।

4.
सिक्का धातु = ताम्र।
सिक्का आकार = गोलाकार।
सिक्का व्यास = 3.2 सै.मी.।
सिक्का मोटाई = 0.4 सै.मी.।
सिक्का भार = 16.9 ग्राम।
सिक्का काल = कुषाण कालीन (दूसरी शताब्दी)।
सिक्का लिपि = अस्पष्ट बैक्ट्रीयन।
सिक्का संग्रहकर्ता = स्व. चंद्र मणि कश्यप, मण्डी।
सिक्का प्राप्ति स्थान = चक्कर, मण्डी।
सिक्का विवरण = प्राप्त सिक्के के एक ओर लिपि के साथ मानव आकृति भी है, जिसके दाईं तरफ हाथ में त्रिशूल दिखाया गया है और बाईं ओर के हाथ में अग्नि-पात्र पकड़े हुए दिखाया गया है। दिखाई गई मानव आकृति का पहना हुआ कोट आगे से खुला है और बाईं ओर एक अक्षर लिखा है। सिक्के के दूसरी ओर एक बैल-सवार को दिखाया गया है और लेख अस्पष्ट है। सिक्का विम कैडफईसिस से संबंधित है।

5.
सिक्का धातु = सोना।
सिक्का आकार = गोलाकार।
सिक्का व्यास = 2.5 सै.मी. के आसपास।
सिक्का मोटाई = 0.15 सै.मी.।
सिक्का भार = 7.8 ग्राम (8 माशा)।
सिक्का काल = कुषाण कालीन।
सिक्का लिपि = यूनानी।
सिक्का संग्रहकर्ता = स्व. ओम प्रकाश, सुनार, मण्डी।
सिक्का प्राप्ति स्थान = मण्डी।
सिक्का विवरण = मण्डी से प्राप्त इस सोने के सिक्के में मानव आकृति व लेख दोनों मिलते हैं। दाढ़ी वाली मानव आकृति के दाएं हाथ में कमंडल व बाएं हाथ में त्रिशूल दिखाया गया है। मानव आकृति द्वारा पहना लंबा कोट आगे से बंद है। आकृति के दोनों तरफ यूनानी लिपि में (∆ K O ∆ P 0 ^ V तथा N K p K I K O p ∆ N) अंकित है।

सिक्के के दूसरी ओर की आकृति का एक हाथ ऊपर उठा है व दूसरा कमर पर रखा हुआ दिखाया गया है। इसमें भी यूनानी लिपि के अक्षर व M I I P O लिखा मिलता है। विद्वान मूलर के अनुसार यह शब्द पर्शिया के Mithra सूर्य देवता को प्रकट करता है। वैसे सोने के इस सिक्के को कैनारकी सिक्कों के अंतर्गत रखा गया है, जो कैडफाईसिस के बाद के हैं।

कुषाण कालीन कुछ और भी अलग-अलग भार व आकार के सिक्के हैं, लेकिन लेख व आकृति स्पष्ट नहीं होने के कारण उनका वर्णन नहीं किया जा रहा, जो मेरे पास सुरक्षित हैं तथा कई अन्य स्थानों से भी प्राप्त हो चुके हैं।

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इंसानियत, कविता – डॉ. कमल के प्यासा

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