पढ़े लिखे लोग – लघु कथा

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रणजोध सिंह – नालागढ़

जब से बनवारी लाल जी पंचायत प्रधान पद के लिए खड़े हुए थे, उनका दिन का चैन और रातों की नींद उनसे रुष्ट हो गई थी| उन्होंने प्रण लिया कि इस बार तो वह जीत हासिल करके ही दम लेंगे| अतः वे अपने गाँव के प्रत्येक घर में स्वयं जाकर वोट के लिए गुहार लगाने लगे| इस उपक्रम के चलते उनकी टांगें दुखने लगी थी| हाथ जोड़ने की इतनी आदत पड़ गई कि स्वयं की पत्नी को देखते तो भी हाथ जोड़ देते और विनम्रता से बोलते, “चुनाव वाले दिन मेरा ख्याल रखना|”

चूँकि उनका गाँव शहर से बिल्कुल सटा हुआ था, अत: शहर के कुछ सभ्रांत लोग उनके गाँव में बस गए थे| इनमें से ज्यादातर स्कूल प्राध्यापक या कॉलेज प्रोफेसर ही थे| प्रोफेसरों की जनसंख्या अधिक होने के कारण गाँव वाले इस कॉलोनी को प्रोफेसर कॉलोनी ही कहते थे| जैसे ही बनवारी लाल जी प्रोफेसर कॉलोनी के नजदीक पहुँचे उन्होंने अचानक इस कॉलोनी के लोगों से वोट न मांगने का निर्णय ले लिया| सभी लोग बहुत अचंभित हुए| “अरे ये बहुत पढ़े-लिखे लोग हैं, न तो किसी की बातों में आते हैं और न ही किसी भी प्रकार के प्रलोभन में| सदैव अपने मन की ही करते हैं, जिन्होंने जिसे वोट डालनी है उसे ही डालेंगे| यहाँ टाइम खराब करके क्या फायदा?” उन्होंने स्पष्टीकरण दिया|

सूरज तो आज भी चमकता है : कविता

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