Tag: रणजोध सिंह

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यू आर वंडरफुल सर – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ सरकारी विभाग में मैं नया-नया लेखाकार के रूप में नियुक्त हुआ था। अभी काम सीख ही रहा था कि कार्यालय में...

जिधर देखूं तू ही तू – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ सर्वभूतेषु येनैकमव्ययं भावमीक्षते। अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम्॥ उपरोक्त श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के 18वें अध्याय का 20वाँ श्लोक है, जिसका अर्थ है—वह ज्ञान,...

पढ़े लिखे लोग – लघु कथा

रणजोध सिंह - नालागढ़ जब से बनवारी लाल जी पंचायत प्रधान पद के लिए खड़े हुए थे, उनका दिन का चैन और रातों की नींद...

सूरज तो आज भी चमकता है : कविता

रणजोध सिंह - नालागढ़ हमने तमाम रौशनी को ढक दिया कंक्रीट के जंगल से वगरना दोस्त, सूरज तो सूरज है आज भी चमकता है| ये जो हर...

पिता- एक कल्पतरु – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ बच्चों की मुस्कान की खातिर अपनी मुस्कान भुलाता है बच्चें रखता राजा जैसे खुद भिखारी लगता है वह और नहीं कोई यारों यकीनन, बच्चों का पिता होता...

कैरियर इंग्लिश मीडियम बच्चों का – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ जैसे ही ग्राम वासियों को पता चला की अगामी चुनावों के मध्य नजर सरकार शिक्षा के प्रति ज्यादा ही उदार हो...

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