रणजोध सिंह - नालागढ़
सर्वभूतेषु येनैकमव्ययं भावमीक्षते। अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम्॥
उपरोक्त श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के 18वें अध्याय का 20वाँ श्लोक है, जिसका अर्थ है—वह ज्ञान,...
रणजोध सिंह - नालागढ़
बच्चों की मुस्कान की खातिर
अपनी मुस्कान भुलाता है
बच्चें रखता राजा जैसे
खुद भिखारी लगता है
वह और नहीं कोई यारों
यकीनन,
बच्चों का पिता होता...