Tag: poem

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रिश्ता — दीप्ति सारस्वत प्रतिमा

दीप्ति सारस्वत प्रतिमा, प्रवक्ता हिंदी, रा .व. मा. विद्यालय, बसंतपुर, शिमला स्वाति और नीलेश पहाड़ घूमने बर्फ़ देखने हनीमून मनाने आये हैं। जिस होटल में वे...

सुविधा — दीप्ति सारस्वत प्रतिमा

दीप्ति सारस्वत 'प्रतिमा', प्रवक्ता रा. व. मा. विद्यालय, बसंतपुर, जिला शिमला । अब तक तीन कविता संग्रह प्रकाशित -- सोचती हूँ, वर्ष 2018; चलती फिरती...

मैं, इस बात से अनजान, अनभिज्ञ — नवनीत कालिया

नवनीत कालिया, शिमला  कितना कुछ था ज़िन्दगी में, जब covid नहीं था। Covid, इतना बेरहम, इतना निर्देयी। मैं, इस बात से अनजान, अनभिज्ञ।। बस, अपनी मासूमियत में, इस...

ज़िंदगी…जी भरके अभी जीना है इसे! — नीलम भट्ट

ज़िंदगी को, उसके हर पल को जी भरके जीना ज़रूरी है... और यह बात जितनी शिद्दत से इस समय महसूस हो रही है, शायद...

अपना खयाल रखना — दीप्ति सारस्वत प्रतिमा

दीप्ति सारस्वत प्रतिमा अपना खयाल रखना अपना खूब खयाल रखना अपनों की मिठास घुली औपचारिक आवाज़ें वरिष्ठ नागरिक के कानों में गूंजती जब - जब वे अपने घर में अकेले तकलीफ़ में होते...

यह समय — नीलम भट्ट

This time is the best and the worst of times. The poem sums up whatever was felt during the Corona pandemic. The time when...

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