नाटक ‘एक मैं और एक तू’: शिमला का सांस्कृतिक रंगमंच

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राजिन्द्र शर्मा (हैप्पी) ने 2001 में शिमला शहर में “एक्टिंग स्पेस” की स्थापना की थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य रंगमंचीय और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक साझा स्थान प्रदान करना है। यहां अभिनेताएं मिलकर काम कर सकते हैं, नेटवर्क बना सकते हैं, और नए प्रयोगों का प्रस्तुतिकरण कर सकते हैं। “एक्टिंग स्पेस” हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत, रंगमंच, और लोक नाट्यों के प्रचार-प्रसार के लिए एक प्रमुख केंद्र है।

गतिविधियाँ और प्रदर्शन: संस्था ने कई पूर्ण नाटक, लघु नाटक, वृत्तचित्र, और लघु फिल्मों का मंचन किया है जो देश और प्रदेश के विभिन्न स्थानों में लगातार होता रहा है। संस्था ने अपनी शैली में निरंतर प्रशिक्षण और अभ्यास पर बल दिया है, जिसमें अभिनय, निर्देशन, और लेखन जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।

नाटक “एक मैं और एक तू” का विवरण:

  • लेखक: नरेंद्र गुप्ता और सुनील सिंहा।
  • कहानी और पात्र:
    • नाटक केंद्रित है जिसमें क्रिमिनल प्रमोद जोशी और असफल वकील बी.पी. श्रीवास्तव के बीच एक रोचक और हास्य पूर्ण दृष्टिकोण को परिचित किया जाता है।
  • नाटक का उद्देश्य:
    • समाज के बड़े-बड़े सवालों को हास्य और उत्सुकता के साथ प्रस्तुत करना।
    • कानून व्यवस्था और इंसान की आंतरिक भावनाओं का चित्रण करना।
  • निर्देशकीय:
    • नाटक को निर्देशित करने के लिए निर्देशक राजिन्द्र शर्मा (हैप्पी) ने बताया कि यह नाटक अभिनय परक है और अभिनेताओं के अभिनय को महत्वपूर्ण बनाए रखने का प्रयास किया गया है।

निर्देशकीय का अनुभव: राजिन्द्र शर्मा (हैप्पी) ने बताया कि नाटक को करने में कई चुनौतियाँ आईं, लेकिन उनकी निष्ठा और समर्पण ने सभी को परिस्थितियों का सामना करने में सहायता की। उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ सब कुछ अपने आप ही होता चला गया और आज उनकी संस्था एक सशक्त और समर्पित सांस्कृतिक केंद्र बन गई है।

लेखक

नरेंद्र गुप्ता, एक अभिनेता और नाटककार, ने रंगमंच की दुनिया में 1972 से अपना सफर शुरू किया और उसे अपने शौक से अपनाया। उन्होंने विदेशी और भारतीय भाषाओं में अनेक प्रमुख नाटकों के हिंदी रूपांतरण किए हैं और उनके कार्य में संगीत, नृत्य, और नाटक सभी में शामिल हैं। उन्होंने लगभग 75 नाटकों में अभिनय किया और लोक कलाओं के साथ नाट्य प्रस्तुतियों में भी शिरकत की है। बहुचर्चित टीवी शो ‘सीआईडी” में फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉक्टर सालूँके की भूमिका में बहुत प्रसिद्धि प्राप्त की। जिसके लिए हाल ही में इन्हें इंटरनेशनल फोरेंसिक साइंस कॉनफेरेंस , नई दिल्ली ने ‘लाइफटाइम अचीवमेन्ट अवॉर्ड’ से नवाज़ा है, समाज में फोरेंसिक साइंस को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए। 

सुनील सिन्हा, एक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक, ने लगभग 45 वर्षों से रंगकर्म में अपनी भूमिका निभाई है। उनका क्षेत्र अभिनय, निर्देशन, संगीत, और शिक्षा में है, और उन्होंने लगभग 35 नाटकों में अभिनय और 25 नाटकों का निर्देशन किया है। उनकी कला और साहित्य के क्षेत्र में योगदान ने उन्हें सांस्कृतिक क्षेत्र में एक प्रमुख व्यक्ति बना दिया है। रंगमंच के साथ-साथ लगभग 38 वर्षों से फ़िल्म और टी०वी० पर भी कार्यरत, अनेकों बहुचर्चित तथा पुरस्कृत फ़िल्मों एवं टी०वी० सीरियल में अभिनय जिनमे माचिस, रुदाली, आरक्षण, नेता जी, कट्टी-बट्टी, मंटो और पैड मैन उल्लेखनीय हैं।

निर्देशक का परिचय

राजिन्द्र शर्मा (हैप्पी), नाट्य कला और अभिनय के क्षेत्र में अपने 27 वर्षों के अनुभव से एक प्रमुख नाटककार और निर्देशक हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण नाटकों का निर्देशन किया है, जो समाज की विभिन्न मुद्दों पर आलोचनात्मक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। उनका संबंध फिल्मों और टीवी सीरियल्स के साथ भी है, और उन्होंने हाल ही में ’83’ फिल्म में अपनी प्रशिक्षण और अभिनय क्षमताओं को दिखाया।

इस सभी कलाकारों के साथ “एक्टिंग स्पेस” ने रंगमंच की नई ऊंचाइयों को छूने का संकल्प लिया है और इससे हिमाचल के सांस्कृतिक और कला समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस इवेंट का आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज, और निदेशक, भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश के साथ सहयोग से किया जा रहा है। इस अद्भुत नाटक के माध्यम से, यह गुजरेगा दर्शकों पर गहरा प्रभाव और संदेश छोड़ेगा, जिससे उन्हें एक सांस्कृतिक और कला समृद्धि की ओर एक नई की ओर एक नजर मिलेगी।

समाप्ति: “एक्टिंग स्पेस” ने नाटक और सांस्कृतिक क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया है और इसने नाटक कला को बढ़ावा देने के लिए समर्थन किया है। नाटक “एक मैं और एक तू” का विशेषज्ञ और हंसी भरा परिचय दिखाता है जो सामाजिक मुद्दों को हल करने के लिए हास्य और उत्सुकता का उपयोग करता है।

नाटक ‘एक मैं और एक तू’: शिमला का सांस्कृतिक रंगमंच

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

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